SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 9 नियम बदले:बैठकों का एजेंडा जारी होगा, IT सिस्टम की जांच होगी; कांग्रेस बोली- ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
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चुनाव आयोग ने शनिवार को बैठक के बाद अपने कामकाज से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए है। आयोग की बैठक में 9 फैसले लिए गए। इनमें वोटरों की सुनवाई, IT सिस्टम, अधिकारियों की विदेश यात्रा और आयोग की बैठकों की प्रक्रिया से जुड़े बदलाव शामिल हैं। अंदरूनी मतभेद के दावों के बीच आयोग की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले सर्वसम्मत से हुए थे। आयोग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।
आयोग का दावा- संधू-जोशी ने प्रतिनियुक्त अधिकारी के आदेश पर आपत्ति जताई थी आयोग ने शनिवार को प्रेस रीलिज जारी कर बताया कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी से जुड़े थे। इंडियन एक्सप्रेस का दावा था कि संधू और जोशी ने उस आदेश पर आपत्ति जताई थी, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की शक्ति केंद्रीय स्तर पर सिमटने की आशंका थी।
आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-पुनर्वितरण आदेश कभी लागू ही नहीं हुए। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का सावधानी से पालन होगा। ईसीआईनेट की जांच के लिए एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जिसमें आईआईटी/आईआईआईटी का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होगा।
फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग ने दी सफाई SIR में नाम नहीं आया तो आवेदन कर सकेंगे आयोग के मुताबिक, SIR में जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे लगातार वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग भी शामिल हैं।
आयोग ने CEO, DEO और ERO को ऐसे लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। SIR के दौरान अब तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक देश में कुल 96.88 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं, यानी करीब 14
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
चुनाव आयोग ने SIR (सर्विस इम्प्रूवमेंट रिक्वेस्ट) विवाद के बीच अपनी कार्यप्रणाली में 9 नए नियम लागू किये। यह कदम चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया, खासकर IT सिस्टम और बैठक एजेंडा के खुलासे को सुनिश्चित करने के लिए। इन बदलावों से चुनावी डेटा की विश्वसनीयता और मतदाता संतुष्टि में सुधार की उम्मीद है। आम जनता के लिए इसका अर्थ है कि चुनावी प्रक्रियाएँ अधिक खुली और जवाबदेह होंगी, जिससे चुनावों पर विश्वास बढ़ेगा और मतदाता अनुभव बेहतर होगा।