SIR विवाद: 'संवैधानिक संस्थाओं की साख...', विपक्ष पर भड़के नितिन नबीन, बोले- माफी मांगे कांग्रेस
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एसआईआर और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर देश में जारी राजनीतिक घमासान के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया, जिसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर पलवार किया है.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि SIR के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे विपक्ष का चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पूरी तरह साफ कर दिया है कि SIR से जुड़ा हर फैसला पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिया था, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने एक गढ़े हुए झूठ के सहारे आरोप लगाए और हमारी संवैधानिक संस्थाओं की साख पर हमला बोला.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, 'कांग्रेस का यह दोहरा रवैया साफ दिखता है कि जब इसी चुनावी प्रक्रिया के जरिए केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कांग्रेस और उसके साथियों को जीत मिलती है तो वे चुनाव आयोग की निष्पक्षता को तुरंत स्वीकार कर लेते हैं.
जब दूसरे राज्यों में जनता का जनादेश उनके खिलाफ जाता है तो वे चुनाव कराने वाली इन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं. लोकतंत्र का सम्मान सहूलियत के हिसाब से नहीं किया जा सकता.'
संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम किया: नितिन नबीन
नितिन नबीन मांग की है कि विपक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए.
उन्होंने कहा, 'चुनाव में हार-जीत तो लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अपनी राजनीति बचाने के लिए देश की सम्मानित संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना और झूठा दुष्प्रचार करना बेहद दुखद है.
जिन लोगों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें देश के सामने अपनी गलती माननी चाहिए और जनता से खुले दिल से माफी मांगनी चाहिए.'
The Opposition has once again been exposed for misleading the public on the SIR.
The Election Commission has made it clear that every decision relating to the SIR was taken unanimously by the full Commission. Yet, Congress chose to build its all
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर भारत के चुनावी प्रक्रिया में SIR (साक्षरता और पहचान पत्र) और वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों पर आधारित है। 2024 के चुनावों में, विपक्ष पर आरोप है कि वे जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी निर्णय वैध हैं। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि मतदाताओं का चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास घटे, जिससे मतदान में अनिश्चितता और चुनावी भागीदारी पर असर प