सितंबर में जन्माष्टमी से लेकर गणेश चतुर्थी:29 दिन का ही होगा भाद्रपद मास; व्रत-उपवास, जप और दान का महासंयोग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →सितंबर यानी भाद्रपद महीना धार्मिक अनुष्ठान, लोक-संस्कृति और आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से फलदायी साबित होने वाला है। चातुर्मास का दूसरा महीना भाद्रपद की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना 26 सितंबर को पूर्णिमा के साथ संपन्न होगी। इस बार कृष्ण पक्ष में षष्ठी तिथि का क्षय होने के कारण भाद्रपद 29 दिनों का ही रहेगा।
यह महीना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से लेकर पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पितृपक्ष तक लगातार बड़े पर्व-त्योहारों से गुलजार रहेगा। ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार, ग्रहों और तिथियों के दुर्लभ तालमेल के कारण भाद्रपद साधकों और गृहस्थों के लिए अभीष्ट फल देने वाला रहेगा।
यह महीना श्रद्धालुओं के लिए व्रत, उपवास, जप और दान का महासंयोग लेकर आ रहा है। भाद्रपद मास मनुष्य को कर्म और बुद्धि में सामंजस्य स्थापित करने के साथ निष्काम साधना से जीवन में सफलता की प्रेरणा देता है।
भाद्रपद महीने में प्रमुख पर्व-त्योहारों का महत्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के पावन संयोग में गृहस्थ और साधु-संत एक साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। इस दिन जयंती योग का अत्यंत शुभ सुयोग बन रहा है।
कुशी अमावस्या : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और साध्य योग में कुशी अमावस्या मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन साल भर के धार्मिक कार्यों के लिए कुश एकत्रित किया जाता है। मिथिला का लोकपर्व चौरचन : मध्याह्न व्यापिनी काल में मिथिलांचल का प्रसिद्ध लोकपर्व चौरचन मनाया जाएगा।
व्रती महिलाएं दिनभर निराहार रहकर संध्याकाल में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेंगी। हरितालिका तीज : भाद्रपद शुक्ल तृतीया को चित्रा-स्वाति नक्षत्र के युग्म संयोग और ब्रह्म योग में सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखेंगी।
गणेश चतुर्थी : भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को स्वाति नक्षत्र और ऐंद्र योग में विघ्नहर्ता भगवान गणेश का जन्मोत्सव (गणेशोत्सव) शुरू होगा। यह उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाएगा। जगह-जगह गणेश जी विराजमान होंगे। ऋषि पंचमी : सप्तऋषियों के स्मरण, पूजन, शुद्धि और प्रायश्चित से जुड़ा पारंपरिक व्रत।
विश्वकर्मा पूजा : देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की आराधना, कल-कारखानों, वाहनों-तकनीकी उपकरणों का पूजन। राधाष्टमी : श्री राधारानी का प्राकट्य दिवस, वैष्णव मंदिरों में विशेष अभिषेक और संकीर्तन का आयोजन। कर्मा-धर्मा एकादशी : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के शुभ योग में कर्मा-धर्मा एकादशी है।
यह भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति की आराधना का लोक पर्व है। अनंत चतुर्दशी : भगवान श्रीहरि विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का महापर्व शतभिषा नक्षत्र और रवियोग में मनाया जाएगा। विष्णु की पूजा की जाती है।
अगस्त्य मुनि तर्पण : भाद्रपद पूर्णिमा पर पूर्वाभाद्रपद और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के युग्म संयोग और बव करण में काश (कुश) के पुष्प, सुपारी और खीरा से देवों व ऋषि-मुनियों का तर्पण किया जाएगा। पितृपक्षारंभ : पूर्वजों, पितरों के तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और आत्मिक शांति के लिए समर्पित महापक्ष का आरंभ।
📡 स्रोत: NewsData.io