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4 सितंबर को जन्माष्टमी:श्रीकृष्ण के साथ माता यशोदा, बलराम, राधा, गौ माता और गोवर्धन पर्वत की भी करें पूजा, दक्षिणावर्ती शंख से करें अभिषेक

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
4 सितंबर को जन्माष्टमी:श्रीकृष्ण के साथ माता यशोदा, बलराम, राधा, गौ माता और गोवर्धन पर्वत की भी करें पूजा, दक्षिणावर्ती शंख से करें अभिषेक

कल (4 सितंबर) श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। द्वापर युग में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए थे। जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि का होना सामान्य बात है, लेकिन इस तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग हर साल नहीं होता है।

कई बार जन्माष्टमी की रात अष्टमी तिथि तो रहती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र नहीं होता। इस साल यह संयोग बना है। इस कारण जन्माष्टमी का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं.

मनीष शर्मा के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण रात में प्रकट हुए थे, इसलिए जन्माष्टमी की रात की घर में विराजित भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के लिए दक्षिणावर्ती शंख का इस्तेमाल करेंगे, तो बहुत शुभ रहेगा। शंख में केसर मिश्रित दूध भरकर भगवान का अभिषेक करें।

पूजा में कच्चे दूध का उपयोग करना चाहिए। इसके बाद भगवान को साफ और आकर्षक पीले वस्त्र पहनाकर हार-फूल के साथ श्रृंगार करें। चंदन का तिलक लगाएं, मुकुट पहनाएं और पूजा स्थल पर मोरपंख रखें।

यशोदा, बलराम और गोवर्धन की भी करें पूजा पूजा में श्रीकृष्ण के साथ ही माता यशोदा, बलराम, राधा, गौ माता और गोवर्धन पर्वत का भी स्मरण करना चाहिए। अगर संभव हो, तो इन सभी की प्रतिमाएं भी पूजा में रख सकते हैं। भोग में माखन-मिश्री, दूध से बनी मिठाई और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं। प्रसाद में तुलसी के पत्ते भी रखना चाहिए।

इसके बाद धूप और दीप जलाकर आरती करें। मंत्र और धार्मिक ग्रंथों का करें पाठ जन्माष्टमी पर भगवान के मंत्रों का जप करें। जैसे- कृं कृष्णाय नम: और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, जय श्रीकृष्ण, राधे-राधे, राधे-कृष्ण मंत्रों का जप कर सकते हैं। मंत्र जप कम से कम 108 बार तुलसी की माला से करना चाहिए।

इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यायों का पाठ करना चाहिए, गीता सार का अध्ययन कर सकते हैं। इनके साथ ही हरिवंश पुराण का पाठ भी किया जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की कथा और उनकी लीलाओं को पढ़ना-सुनना भी पूजा का हिस्सा माना जाता है। यमुना स्नान संभव न हो, तो घर में ऐसे करें स्नान

📡 स्रोत: NewsData.io

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