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सितंबर में भी क्यों नहीं घट रही बिजली की मांग, कई पावर प्लांट में कोयले का संकट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 14 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सितंबर में भी क्यों नहीं घट रही बिजली की मांग, कई पावर प्लांट में कोयले का संकट

आमतौर पर सितंबर आते- आते देश में बिजली की मांग कम होने लगती है.

असल में सितंबर में तो गर्मी भी कम होने लगती है और मानसून की वजह से तापमान भी कम हो जाता है. लेकिन इस साल मामला कुछ अलग ही है.

इस साल तो सितंबर में भी गर्मी का एहसास हो रहा है और इस वजह से देश में बिजली की मांग बढ़ी हुई है.

सितंबर 2026 में देश की पीक पावर डिमांड 260 गीगावाट के पार पहुंच गई थी.

मजे की बात ये है कि 8 सितंबर को बिजली की मांग 260 GW हो गई, जबकि इससे एक दिन पहले ये बस 257 GW थी. पूरे महीने बिजली की मांग 249 GW से ऊपर ही बनी हुई है.

ऐसे में सवाल ये आता है कि सितंबर में भी बिजली की इतनी जरूरत क्यों पड़ रही है?

क्या है सबसे बड़ा कारण?

बिजली की मांग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इस समय तो मौसम है.

देश के कई हिस्सों में सितंबर में भी तापमान नॉर्मल से ज्यादा है. इसका सीधा असर घर और ऑफिस में बिजली की खपत पर पड़ रहा है. गर्मी ज्यादा होने पर लोग एसी, कूलर और पंखे ज्यादा समय तक चलाते हैं.

इसीलिए सितंबर में भी कूलिंग की जरूरत कम नहीं हुई है.

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कम बारिश से क्या हुआ नुकसान?

इस साल तो मानसून का पैटर्न भी बदला- बदला सा दिख रहा है. कई इलाकों में बारिश कम हुई है.

बारिश कम होने का असर सिर्फ मौसम पर नहीं बल्कि बिजली के उत्पादन पर भी पड़ता है.

जब बारिश कम होती है और पानी का स्तर घटता है तो हाइड्रो पावर का उत्पादन कम होता है.

ऐसे में बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए कोयले और गैस से चलने वाला पावर प्लांट काम आता है.

खेती में ने खिंची बिजली?

कम बारिश का एक और असर खेती पर पड़ा है.

जब बारिश से किसानों की सिंचाई की जरूरत पूरी नहीं होती तो ट्यूबवेल और पंप

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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