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अब सिविल जज बनने 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदले; 2027 से सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप भी जरूरी होगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अब सिविल जज बनने 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदले; 2027 से सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप भी जरूरी होगी

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के लिए वकीलों की अनिवार्य प्रैक्टिस टाइम तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया है। कोर्ट ने 2025 के उस फैसले में बदलाव किया है, जिसमें शुरुआती ज्यूडीशियल सर्विस में भर्ती के लिए तीन साल की प्रैक्टिस जरूरी की गई थी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह निर्देश दिए। जस्टिस चंद्रन ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि बार में तीन साल की प्रैक्टिस जरूरी करने वाले पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि एक अप्रैल 2027 के बाद होने वाले सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एग्जाम के हर उम्मीदवार के पास कम से कम 1 साल की प्रैक्टिस होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को संबंधित हाईकोर्ट से सलाह लेकर तीन महीने के भीतर लागू सेवा नियमों में बदलाव करने और उन्हें नोटिफाई करने का निर्देश दिया है।

प्रैक्टिस सर्टिफिकेट और रिकॉर्ड जरूरी कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस को सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस के जरिए सत्यापित किया जाएगा। यह सर्टिफिकेट तभी जारी होगा, जब उम्मीदवार की अदालत में मौजूदगी और प्रभावी न्यायिक कार्यवाही में भागीदारी का रिकॉर्ड हाईकोर्ट की तय व्यवस्था के तहत दर्ज हो।

कोर्ट ने कहा कि इस भर्ती से चुने गए उम्मीदवारों को स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी में एक साल की गहन ट्रेनिंग लेनी होगी। इसके बाद छह महीने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज या हायर ज्यूडिशियल सर्विस के किसी सदस्य के अधीन लॉ क्लर्कशिप करनी होगी।

इसके बाद उम्मीदवारों को संबंधित हाईकोर्ट के मौजूदा जज के अधीन छह महीने की और क्लर्कशिप करनी होगी। ट्रांजिशन पीरियड में सभी लॉ ग्रेजुएट आवेदन कर सकेंगे ट्रांजिशन पीरियड के लिए कोर्ट ने कहा कि लॉ ग्रेजुएट पहले लागू तीन साल की प्रैक्टिस शर्त के बावजूद आवेदन कर सकेंगे।

आवेदन के लिए उम्मीदवारों को एक साल की सक्रिय प्रैक्टिस पूरी कर चुका माना जाएगा। कोर्ट ने कहा, “सभी लॉ ग्रेजुएट तीन साल की प्रैक्टिस शर्त के बावजूद आवेदन करने के योग्य होंगे। रिव्यू किए जा रहे फैसले को सुनाए हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है।

इसलिए आवेदन के उद्देश्य से ऐसे उम्मीदवारों को एक साल की सक्रिय प्रैक्टिस पूरी कर चुका माना जाएगा।” कोर्ट ने प्रैक्टिकल अनुभव की जरूरत बरकरार रखी कोर्ट ने पहले की प्रैक्

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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