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सोनभद्र में 4 डॉक्टरों पर FIR का आदेश:डिलीवरी में मनमानी और धमकी का आरोप, कोर्ट ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सोनभद्र में 4 डॉक्टरों पर FIR का आदेश:डिलीवरी में मनमानी और धमकी का आरोप, कोर्ट ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

सोनभद्र में एक निजी अस्पताल के चार डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन अभिलाषा की अदालत ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को दिया। मामला दो साल पहले अधिवक्ता की पत्नी की डिलीवरी के दौरान डॉक्टरों द्वारा की गई मनमानी और धमकी से जुड़ा है। कोर्ट ने सात दिन के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट भी मांगी है।

अधिवक्ता संतोष पटेल ने 29 नवंबर 2024 को सीजेएम कोर्ट, सोनभद्र में प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने बताया कि 4 अगस्त 2024 की शाम उन्होंने अपनी पत्नी विभा शाक्य को रॉबर्ट्सगंज शहर के एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। अगले दिन 5 अगस्त 2024 की शाम करीब 5 बजे डॉक्टर मुक्ता सिंह ने ऑपरेशन कर एक बच्चे को जन्म दिया।

जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ थे, इसलिए 9 अगस्त 2024 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अधिवक्ता का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान अस्पताल में अवैध वसूली के लिए उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया। डॉक्टर नेहा सिंह राना ने उनके साथ बदतमीजी भी की। जब उन्होंने अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर आरपी सिंह को इस बारे में बताया, तो उन्होंने भी धमकी भरे लहजे में कहा कि डॉक्टरों से पंगा न लें, वरना मरीज को नुकसान होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि वह बच्चों के डॉक्टर हैं और मरीज को डॉक्टर नेहा सिंह राना को देखना है। इसके बाद 4 सितंबर 2024 को अधिवक्ता ने डॉक्टर आरपी सिंह, डॉक्टर मुक्ता सिंह और डॉक्टर नेहा सिंह राना को कानूनी नोटिस भेजा। इसमें लिखा था कि 30 दिन के भीतर जवाब न देने पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

नोटिस मिलने के बाद 12 सितंबर 2024 को डॉक्टर नेहा सिंह राना ने दोपहर में मोबाइल पर गाली देते हुए धमकी दी। जब किसी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया, तो अधिवक्ता ने रॉबर्ट्सगंज थाने में और 4 नवंबर 2024 को रजिस्टर्ड डाक से एसपी सोनभद्र को सूचना दी। कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की।

12 दिसंबर 2025 को सीजेएम कोर्ट के आदेश से यह मामला सुनवाई के लिए स्थानांतरित किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कोतवाली पुलिस की आख्या जिसमें कोई एफआईआर दर्ज नहीं होने, गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए पुलिस से विवेचना कराया जाना आवश्यक मानते हुए रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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