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सोनिया गांधी की किताब को लेकर था दबाव? पेंगुइन रेंडम हाउस का बड़ा दावा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सोनिया गांधी की किताब को लेकर था दबाव? पेंगुइन रेंडम हाउस का बड़ा दावा

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' को लेकर देश में राजनीति गरमाई हुई है. इस किताब का प्रकाशन नहीं करने को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सफाई दी है.

पब्लिशर ने कहा कि सोनिया गांधी की आत्मकथा को प्रकाशित नहीं करने के उसके फैसले के पीछे कोई बाहरी दबाव नहीं था बल्कि चर्चा के दौरान एक विशेष मुद्दे को लेकर गतिरोध सामने आया था. पब्लिशर ने समझौते और लेखक की गोपनीयता का हवाला देते हुए उस मुद्दे का खुलासा नहीं किया. कांग्रेस ने लगाए थे दवाब बनाने के आरोप

अमेरिका स्थित प्रकाशक अल्फ्रेड ए नॉफ ने घोषणा की है कि यह पुस्तक 10 नवंबर को दुनियाभर में प्रकाशित होगी. अल्फ्रेड ए. नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस का एक प्रकाशन संस्थान है. कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार के दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं.

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे से संबंधित अंश हटाने का दबाव डाला गया था.

पेंगुइन ने बाहरी दबाव की बात को नकारा पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने स्पष्ट रूप से उन अटकलों को खारिज किया कि इस किताब को प्रकाशित नहीं करने का फैसला बाहरी हस्तक्षेप के कारण लिया गया.

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने कहा, हमारा मानना है कि बिलॉन्गिंग के संबंध में कुछ गलत प्रस्तुतियों को स्पष्ट करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस किताब को पब्लिश करने के लिए वास्तव में उत्सुक था और इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे.

पब्लिशर ने कहा, चूंकि पुस्तक की विषय-वस्तु गोपनीय है और उस पर प्रकाशन से पहले का प्रतिबंध (एम्बार्गो) है... किसी भी तरह का बाहरी दबाव

📡 स्रोत: ABP Live

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