स्टेशनों पर सुविधाएं थर्ड क्लास:7 साल पहले होना था सुधार, पर अभी तक नहीं हुआ...प्रदेश के 20 स्टेशन फेल; पानी, पार्किंग और रैंप की कमी
रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं थर्ड क्लास हैं। यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की जांच में हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे स्टेशनों को अगस्त, 2018 तक आधुनिक बनाने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लक्ष्य के सात साल बाद भी राजस्थान के 29 में से 20 रेलवे स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं (एमईए) में कमी मिली। यानी करीब 69 फीसदी स्टेशन तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।
सबसे खराब स्थिति उदयपुर रेलवे स्टेशन की मिली। एनएसजी-3 श्रेणी के इस स्टेशन पर पेयजल नल, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेल्टर, टायलेट और वाटर कूलर तक की कमी पाई गई। एनएसजी-2 श्रेणी के जोधपुर स्टेशन पर बैठने की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली।
अजमेर में प्लेटफॉर्म शेल्टर की कमी रही, जबकि एनएसजी-3 श्रेणी के अलवर स्टेशन पर शौचालय पर्याप्त नहीं मिले। जयपुर के दुर्गापुरा और गेटोर जगतपुरा समेत 16 अन्य स्टेशनों पर भी यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं कम मिलीं।
इस महीने सार्वजनिक की गई इस रिपोर्ट में फरवरी 2025 तक के पैसेंजर एमीनिटीज मैनेजमेंट सिस्टम (पीएएमएस) के डेटा का भी विश्लेषण किया। हालांकि, बाद कुछ स्टेशनों में कैग को कमियों को सुधारने की सूचना दी, लेकिन कई स्टेशनों को रिपोर्ट के बाद कमियां जस की तस है।
बता दें, रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने और यात्री सुविधाएं बढ़ाने की कवायद के बीच कैग ने देशभर के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों की जांच की थी। इनमें 458 यानी 89 फीसदी से ज्यादा स्टेशनों पर न्यूनतम जरूरी यात्री सुविधाओं में कमी देखी गई थी।
प्रदेश के इन स्टेशनों पर भी कमी मिली दुर्गापुरा, हनुमानगढ़, मकराना, गेटोर जगतपुरा, कुचामन सिटी, संगरिया, समदड़ी, नसीराबाद, पीलीबंगा, चिरावा, नोहर, राजोसी, पीपाड़ रोड, गजनेर, ओसियां और डूंडलोद-मुकुंदगढ़ स्टेशन पर यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं कम थीं।
दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप, पार्किंग, गैर-फिसलन वाले रास्ते भी नहीं मिले राजस्थान समेत उत्तर-पश्चिम रेलवे के स्टेशनों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप, पार्किंग, गैर-फिसलन वाले रास्ते, पानी के नल और अन्य सुविधाओं में गंभीर कमी मिली।
ऑडिट में शामिल 512 में से 227 स्टेशनों पर रैंप, 133 पर दिव्यांगों के लिए पार्किंग और 77 पर पार्किंग से स्टेशन भवन तक गैर-फिसलन वाला रास्ता उपलब्ध नहीं था। वहीं 512 में से 297 स्टेशनों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए पेयजल नल की कमी मिली।
सबसे ज्यादा कमी पंखों और वाटर कूलर की अप्रैल 2018 में तय मानकों के आधार पर पेयजल, प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म शेल्टर, यूरिनल, शौचालय, पंखे, फुट ओवरब्रिज, डस्टबिन, घड़ी समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं देने का लक्ष्य था। कैग ने इनको ही जांच का आधार बनाया था।
रेलवे को सुविधाओं को मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराने के लिए 31 अगस्त 2018 तक का समय दिया गया था। नल लगे, लेकिन पानी साफ नहीं मिल रहा रिपोर्ट में पेयजल की उपलब्धता के साथ गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। कई स्टेशनों पर पेयजल टैंकों की सफाई के रिकॉर्ड में कमी मिली। कुछ जगह अवशिष्ट क्लोरीन की जांच भी नहीं हो रही थी।
सुविधाओं के लिए पैसा और काम स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण समय पर पूरा नहीं हुआ। इसके पीछे योजना, निगरानी, प्राथमिकता तय करने और काम के क्रियान्वयन में कमजोरी को प्रमुख कारण माना है।
📡 स्रोत: NewsData.io