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‘सुगंधा : महक 84 का जादू’ में जीवन के सात रंगों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति, पूर्व ग्रुप कैप्टन एवं शिक्षाविद् विजयकांत वर्मा का कविता संग्रह प्रकाशित, 84 कविताओं में पराक्रम से आस्था तक के भावों को दिया स्वर

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 6 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘सुगंधा : महक 84 का जादू’ में जीवन के सात रंगों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति, पूर्व ग्रुप कैप्टन एवं शिक्षाविद् विजयकांत वर्मा का कविता संग्रह प्रकाशित, 84 कविताओं में पराक्रम से आस्था तक के भावों को दिया स्वर

भोपाल। साहित्य केवल शब्दों और भावों का संयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य के अनुभव, संवेदनाओं, संस्कारों और जीवन-दर्शन को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी है। इसी भावभूमि पर पूर्व ग्रुप कैप्टन एवं शिक्षाविद् विजयकांत वर्मा का कविता संग्रह ‘सुगंधा : महक 84 का जादू’ प्रकाशित हुआ है।

एलाइन वन, नई दिल्ली से प्रकाशित इस संग्रह में 84 कविताओं को सात जीवन-मूल्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। कविता संग्रह की खासियत इसका वैचारिक और भावनात्मक विन्यास है।

लेखक ने 84 कविताओं को पराक्रम, प्रीति, प्रकृति, प्रमदा, प्रमोद, परिदर्शन और प्रत्यय जैसे सात जीवन-मूल्यों में विभाजित किया है। इन भावों को सात अलग-अलग पुष्पों के प्रतीकों से जोड़ा गया है।

पलाश को पराक्रम, गुलाब को प्रीति, पारिजात को प्रकृति, चंपा को नारी गरिमा, मोगरा को आनंद, कमल को ज्ञान-विवेक और रजनीगंधा को आस्था एवं विश्वास का प्रतीक बनाया गया है। संग्रह की कविताओं में राष्ट्रप्रेम और वीरता के स्वर के साथ प्रेम, प्रकृति, नारी सम्मान, जीवन-दर्शन और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

कुछ रचनाएं देश और राष्ट्रभावना को केंद्र में रखती हैं, तो कुछ प्रेम और आत्मीयता की अनुभूतियों को स्वर देती हैं। प्रकृति से जुड़े चित्रण में सौंदर्य और संवेदना का मेल दिखाई देता है, जबकि नारी विषयक रचनाओं में सम्मान और सृजनशक्ति को प्रमुखता दी गई है।

जीवन के गहरे प्रश्नों, आत्ममंथन और विश्वास को भी संग्रह में स्थान मिला है। इस विविधता के कारण ‘सुगंधा : महक 84 का जादू’ केवल कविताओं का संकलन न रहकर जीवन के अलग-अलग अनुभवों और भावनाओं का विस्तृत संसार बन जाता है। विजयकांत वर्मा का सैन्य सेवा और शिक्षा जगत से जुड़ा अनुभव भी उनकी रचनात्मक दृष्टि को व्यापक बनाता है।

राष्ट्रसेवा के साथ वे सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, प्रतिभाशाली बच्चों की शिक्षा और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने जैसे कार्य उनके द्वारा स्थापित एमआर गीता चंद्र वेलफेयर समिति के माध्यम से किए जा रहे हैं।

उनके सामाजिक अनुभव और जीवन के विविध पक्षों की समझ का प्रभाव उनकी कविताओं में भी दिखाई देता है। संग्रह की रचनाओं में भावनात्मक विविधता के साथ भाषा और प्रस्तुति की कलात्मक दक्षता भी दिखाई देती है, जो इसे आरंभ से अंत तक पठनीय बनाती है।

पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक हो सकती है, जो कविता में केवल शब्द-सौंदर्य नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूति, विचार की गहराई और मानवीय संवेदना तलाशते हैं।

84 कविताओं के माध्यम से सात जीवन-मूल्यों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह संग्रह साहित्य और जीवन के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास करता है। ‘सुगंधा : महक 84 का जादू’ में राष्ट्रप्रेम से लेकर प्रेम, प्रकृति, नारी गरिमा, आनंद, ज्ञान और आस्था तक जीवन के विभिन्न रंगों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी गई है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

विजयकांत वर्मा का नया कविता संग्रह ‘सुगंधा : महक 84 का जादू’ जीवन के सात मूल्यों—पराक्रम, आस्था, प्रेम, ज्ञान, शांति, सौहार्द, और समर्पण—को 84 कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत करता है। यह विषय साहित्य के माध्यम से मानवीय अनुभवों और भावनाओं को व्यक्त करने की कला पर प्रकाश डालता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक प्रतिष्ठित पूर्व ग्रुप कैप्टन और शिक्षाविद् की रचनात्मक उपलब्धि को उजागर करती है, जो साहित्य प्रेमियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि प

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।