Sugar Price Control: चीनी के दाम रोकने के लिए सरकार का सख्त प्लान; 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू, एथेनॉल डायवर्जन की बात को बताया झूठ

आगामी त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में आई तेजी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने देश भर के थोक व्यापारियों और स्टॉकिस्टों पर तत्काल प्रभाव से 400 मीट्रिक टन की स्टॉक लिमिट (Stock Limit) लागू करने का आदेश जारी किया है।
इसके साथ ही सरकार ने उन रिपोर्टों और अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) के लिए गन्ने के रस के डायवर्जन की वजह से देश में चीनी महंगी हुई है।
जमाखोरी रोकने के लिए 400 टन की सख्त स्टॉक लिमिट खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, त्योहारी मांग के दौरान कृत्रिम कमी पैदा कर अनुचित मुनाफा कमाने वाले सट्टेबाजों और जमाखोरों पर नकेल कसने के लिए यह सीमा तय की गई है: थोक व्यापारी और डीलर: कोई भी थोक व्यापारी किसी भी समय 400 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा।
रिटेलर्स और चेन आउटलेट्स: खुदरा विक्रेताओं और बड़ी रिटेल चेन्स के प्रत्येक आउटलेट के लिए अलग से सीमित स्टॉक कैपिंग लागू की गई है। अनिवार्य पोर्टल रजिस्ट्रेशन: सभी डीलरों और मिलों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर अपने साप्ताहिक स्टॉक की स्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।
समयसीमा: यह पाबंदी त्योहारी सीजन के अंत यानी 30 नवंबर तक पूरे देश में प्रभावी रहेगी।
एथेनॉल डायवर्जन के दावों को सरकार ने बताया बेबुनियाद बाजार में यह चर्चा जोरों पर थी कि केंद्र की बायोफ्यूल नीति के तहत गन्ने के रस (Cane Juice) और बी-हैवी शीरे (B-Heavy Molasses) को एथेनॉल उत्पादन में भेजने के कारण चीनी की फिजिकल सप्लाई घट गई है।
इस पर खाद्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में एथेनॉल उत्पादन का 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा अनाजों (मक्का और अतिरिक्त चावल) से पूरा किया जा रहा है। चीनी मिलों से केवल उसी अधिशेष क्षमता को एथेनॉल के लिए अनुमति दी गई है जो घरेलू खाद्य सुरक्षा को प्रभावित न करे।
मंत्रालय ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने के पीछे मुख्य कारण कुछ उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता और कुछ व्यापारियों द्वारा की गई सट्टेबाजी है, न कि एथेनॉल पॉलिसी।
थोक उपभोक्ताओं और मिलों के लिए भी तय किए गए नियम सरकार ने केवल व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं पर भी पाबंदियां लगाई हैं: 15 दिन का स्टॉक नियम: हलवाई, कोल्ड ड्रिंक्स, बेकरी, कन्फेक्शनरी और बिस्कुट बनाने वाली बड़ी कंपनियों को अपनी अधिकतम 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक का अग्रिम स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
गोदामों का भौतिक सत्यापन: राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीमों को मिलों और गोदामों में औचक निरीक्षण (Physical Verification) करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोटा जारी होने के बावजूद मिलों द्वारा आपूर्ति रोके रखने पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
अक्टूबर से नया पेराई सीजन: चीनी मिलों को आगामी 15 अक्टूबर से नया पेराई सत्र शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे अक्टूबर के महीने में ही 10 लाख टन से ज्यादा नई चीनी बाजार में आ सकेगी।
उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद खाद्य मंत्रालय ने दोहराया है कि देश में घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी भंडार मौजूद है और किसी भी प्रकार की घबराहट (Panic Buying) की आवश्यकता नहीं है।
सरकार के पास मासिक रिलीज कोटा प्रणाली के जरिए आपूर्ति को संतुलित रखने का पूरा तंत्र उपलब्ध है। 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू होने और मंडियों में सख्ती बढ़ने से त्योहारी सीजन के दौरान खुदरा कीमतों में स्थिरता आने और आम जनता को राहत मिलने की पूरी संभावना है।
📡 स्रोत: NewsData.io