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सूखे से निपटने के लिए वैश्विक रणनीति में बदलाव जरूरी: भूपेंद्र यादव

लेखक: DD News अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सूखे से निपटने के लिए वैश्विक रणनीति में बदलाव जरूरी: भूपेंद्र यादव

अगस्त 25, नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सूखे से निपटने के लिए वैश्विक रणनीति में बदलाव की जरूरत बताई है।

मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित UNCCD CoP17 के मंत्रीस्तरीय संवाद में उन्होंने कहा कि सूखे को बार-बार आने वाली आपदा के बजाय पहले से अनुमानित और रोके जा सकने वाले जोखिम के रूप में देखना होगा।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि सूखा अब केवल मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि यह जल सुरक्षा, खाद्य व्यवस्था, जैव विविधता और आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने सूखे से निपटने के लिए राहत और प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर तैयारी, रोकथाम और लचीलेपन पर ध्यान देने की जरूरत बताई।

केंद्रीय मंत्री ने सूखा प्रबंधन में भारत के अनुभव साझा करते हुए बताया कि देश में बारिश की निगरानी और सैटेलाइट आधारित सूखा आकलन के जरिए समय रहते तैयारियां शुरू की जाती हैं। जल संरक्षण, वाटरशेड विकास, जल संचयन, भूजल रिचार्ज और वनीकरण जैसे उपायों के माध्यम से सूखे के प्रभाव को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जंगलों और कैचमेंट क्षेत्रों की बहाली से मिट्टी के कटाव को रोकने, पानी के संरक्षण और भूजल रिचार्ज में मदद मिलती है। वहीं, नदियों के पुनर्जीवन और पारंपरिक जल स्रोतों की बहाली से ग्रामीण क्षेत्रों की जल सुरक्षा मजबूत की जा सकती है।

भूपेंद्र यादव ने किसानों के लिए फसल बीमा, जलवायु-अनुकूल फसलों और तकनीक आधारित सूखा आकलन को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समुदायों की भागीदारी, क्षमता निर्माण और आजीविका के विविधीकरण के जरिए सूखा-रोधी भविष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। फ़ाइल फ़ोटो

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