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सुल्तानपुर में 112 साल पुरानी रामलीला शुरू:शिव बारात के साथ निकली शोभायात्रा, 14 दिन तक अयोध्या के कलाकार करेंगे मंचन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सुल्तानपुर में 112 साल पुरानी रामलीला शुरू:शिव बारात के साथ निकली शोभायात्रा, 14 दिन तक अयोध्या के कलाकार करेंगे मंचन

सुल्तानपुर में 112 साल पुरानी रामलीला की शुरुआत गुरुवार देर रात शिव बारात के साथ हुई। शहर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भगवान विष्णु, ब्रह्मा और भगवान शिव के स्वरूप धारण किए कलाकारों से सजी झांकियां निकाली गईं। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। अगले 14 दिनों तक रामलीला मैदान में अयोध्या से आए कलाकार रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का मंचन करेंगे।

पूजा-अर्चना के बाद रवाना हुई शोभायात्रा रामलीला परिसर में हनुमान त्रिपाठी, नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल समेत अन्य लोगों ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ठठेरी बाजार स्थित बड़ी दुर्गा के पंडाल पर शिव बारात में शामिल बारातियों का स्वागत किया गया।

यहां सुनील सोनी, पवन कसौधन और दिनेश चौरसिया समेत अन्य लोगों ने बारातियों को जलपान कराया। शोभायात्रा शहर के चौक, शाहगंज चौराहा, डाकखाना चौराहा और गल्ला मंडी होते हुए वापस रामलीला मैदान पहुंचकर संपन्न हुई। 14 दिन तक होंगे रामलीला के प्रसंग रामलीला के दौरान नारद मोह, ताड़का वध, रावण जन्म, राम विवाह, लंका दहन, मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध और ऐतिहासिक दशहरे सहित रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

कार्यक्रम के अनुसार रामलीला मैदान के साथ शहर के विभिन्न चौराहों पर भी प्रस्तुतियां होंगी। 1890 से हो रहा रामलीला का आयोजन आयोजकों के अनुसार, जिले में रामलीला मंचन की शुरुआत वर्ष 1890 में हुई थी। तब से शारदीय नवरात्र के दौरान इसका आयोजन होता आ रहा है। पिछले करीब 60 वर्षों से अयोध्या के कलाकार रामलीला के विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रहे हैं।

श्री श्री 108 बाबा सागरदास आदर्श रामलीला मंडल, हनुमानगढ़ी अयोध्या के कलाकार इस आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। प्रबंधक महंत शिव सिंह के नेतृत्व में कलाकार मंचन से पहले संवाद और प्रस्तुतियों का अभ्यास करते हैं। कलाकारों का कहना है कि रामलीला के भावपूर्ण दृश्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करना उनका उद्देश्य है।

मंच पर पहुंचकर पात्र के अनुरूप स्वयं को ढालना चुनौतीपूर्ण होता है। रामलीला देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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