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सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुनवाई आज:एकतरफा फैसले लेने का आरोप; मांग- फैसला आने तक कामकाज से अलग रखा जाए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुनवाई आज:एकतरफा फैसले लेने का आरोप; मांग- फैसला आने तक कामकाज से अलग रखा जाए

सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। ये याचिकाएं स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई हैं। आरोप है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को पलटने, ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने और SIR में मतदाताओं के नाम हटाने की SIT जांच की मांग की है।

साथ ही CEC को अंतिम फैसला आने तक पद के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है। CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाओं में कहा गया है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए गए। पहली याचिका की मांगें दूसरी याचिका की मांगें ज्ञानेश कुमार के अलावा बाकी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग याचिका में सक्षम प्राधिकरण को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज करने और मुकदमा शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

यह कार्रवाई ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और जिम्मेदार पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ मांगी गई है। याचिका में धारा 32 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान में मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन या सुधार से जुड़े सरकारी कर्तव्य के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है।

फॉर्म 6 और वोटर डेटा को लेकर भी आरोप याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि Form 6 में बिना अनुमति बदलाव किया गया। इसके अलावा, वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज करने का भी आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि ECINet सिस्टम के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल नहीं किए गए।

इसमें ECI के नाम पर बताए गए मतदाताओं को शामिल करने को चुनौती देते हुए पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने का भी जिक्र है। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ ज्ञानेश कुमार पर विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें SIR को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेदों का जिक्र था।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव पैनल के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर बार-बार चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो याचिकाओं पर सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी, जिनमें स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े 14 फैसलों पर सवाल उठाया गया है। इन फैसलों को दो अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना लेने का आरोप है। यह विषय चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है, जो लोकतंत्र की नींव को प्रभावित करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि फैसले उलटे, तो SIR के तहत मतदाता सूचियों में बदलाव और चुनावी नियमों में सुधार की मांग होगी। आम जनता पर इसका असर चुनावी अधिकारो

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