देश

सुप्रीम कोर्ट बोला- गलत नंबर डायल कर रहे, प्रदर्शन करें:याचिका खारिज; लोकसभा-राज्यसभा की आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग की थी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सुप्रीम कोर्ट बोला- गलत नंबर डायल कर रहे, प्रदर्शन करें:याचिका खारिज; लोकसभा-राज्यसभा की आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग की थी

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को लोकसभा और विधानसभा की SC-ST आरक्षित सीटों के अनिवार्य रोटेशन की याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से हल्के अंदाज में कहा, 'आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं। यह विरोध और प्रदर्शन का दौर है, शायद आपको भी ऐसा करना चाहिए।' सुप्रीम कोर्ट की CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी.

मोहना की बेंच ने याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया। कहा, 'आरक्षित सीटों का रोटेशन लागू करना विधायिका का विषय है। संविधान के अनुच्छेद 332 में SC-ST के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान है।' याचिका खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ता का तर्क- वोटर के पास सीमित विकल्प होता है याचिका उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट से जुड़े मतदाता जगदीश सिंह ने लगाई थी।

यह सीट 1952 में पहले चुनाव के बाद से सात दशक से ज्यादा समय से SC के लिए आरक्षित है। जगदीश सिंह ने कहा कि इससे सिर्फ चार-पांच परिवारों को फायदा हुआ है। उन्होंने कम से कम विधानसभा की आरक्षित सीटों पर रोटेशन व्यवस्था लागू करने पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में आरक्षित सीटों के लिए रोटेशन व्यवस्था पहले से लागू है।

विधानसभा सीटों पर यह व्यवस्था नहीं होने से मतदाताओं के चुनावी विकल्प सीमित होते हैं। यह दावा भी किया कि वोटर केवल SC समुदाय के उम्मीदवारों में से ही चुन सकता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन है। मामले में सुप्रीम कोर्ट की 5 बड़ी बातें 1, यह मान लेना सही नहीं है कि लोग जाति के आधार पर ही वोट देते हैं।

कोर्ट लोकतांत्रिक पसंद पर न्यायिक फैसला नहीं दे सकता। यह फैसला मतदाताओं को करना है। 2.

आपकी दलील इस धारणा पर आधारित है कि बहुसंख्यक समुदाय जाति या समुदाय के आधार पर वोट करेगा। ऐसा जरूरी नहीं है। 3.

चुनाव लड़ने का आपका अधिकार भी सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है। आप दूसरी गैर-आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। 4.

कोई व्यक्ति किसी विचारधारा का समर्थन या विरोध कर सकता है। उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति की पहचान अहम नहीं रह जाती। 5.

किन सीटों को आरक्षित किया जाएगा, यह एक अलग विषय है। किसी सीट को आरक्षित करने के लिए अपनाए गए मानदंड से सिर्फ असहमति होने पर प्रक्रिया असंवै

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।