सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी पर सवाल उठाए:कहा- गुजरात में रोक के बावजूद जहरीली शराब से 600+ मौतें; महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स के 2 नियम रद्द
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराबबंदी से शराब की लत और जहरीली शराब से होने वाली मौतें खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि जबरन शराबबंदी, शराब की समस्या का समाधान नहीं है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि गुजरात में दशकों से शराबबंदी लागू हैं, लेकिन जहरीली शराब से हो रही मौतें नहीं रुकीं।
मेथनॉल मिली शराब से 10 बड़े हादसों में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। सुप्रीम कोर्ट 18 सितंबर को महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स, 1972 के नियम 18A और 18B रद्द करने का फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने और रखने को नियंत्रित किया गया था। गैर-दवा निर्माताओं को बिक्री से पहले मेथनॉल में रंग और कड़वा पदार्थ मिलाना जरूरी था।
कोर्ट ने भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश की हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया। इन घटनाओं में क्रमशः करीब 13 और 15 लोगों की मौत हुई थी। सख्ती से शराब का कारोबार अंडरग्राउंड होता है सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शराब पर पूरी तरह रोक लगाने से शराब का कारोबार अंडरग्राउंड हो जाता है।
इससे जहरीली शराब का चलन बढ़ता है। फैसले में कहा गया, “भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश में हाल में हुई जहरीली शराब की घटनाएं अधिकारियों को फिर से जागने और कार्रवाई करने की याद दिलाती हैं।” कोर्ट ने शराबबंदी के पांच नुकसान गिनाए कोर्ट ने शराबबंदी से जुड़े पांच “नुकसान” बताए। इनमें टैक्स से होने वाले राजस्व का नुकसान, शराबबंदी लागू करने पर होने वाला खर्च और अच्छे-खासे पैसे का इस्तेमाल शामिल है।
इसके अलावा पुलिस और आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध शराब बनाना और उससे पैदा होने वाला नशीले पदार्थों का खतरा भी इन नुकसानों में शामिल हैं। महाराष्ट्र के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स के नियम 18A और 18B को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने पर रोक लगाई गई थी। गैर-दवा निर्माता को मेथनॉल बेचने से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना भी जरूरी किया गया था। ये नियम 1991 में मुंबई के छाया बार से खरीदी गई नकली शराब पीने के बाद हुई मौतों के बाद लागू किए गए थे। कुल 250 लोगों ने यह शराब पी थी, जिनमें से 93 की मौत हो गई थी।
बाद में पता चला था कि इन लोगों ने मेथनॉल पीया था। मेथनॉल जहर से कम खत
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी के प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि जबरन शराब प्रतिबंध से लत या जहरीली शराब से होने वाली मौतें नहीं रुकतीं। गुजरात में दशकों से शराबबंदी के बावजूद मेथनॉल युक्त शराब से 600 से अधिक मौतें हुईं। यह विषय शराब नीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सख्त प्रतिबंध से नशे की समस्या का समाधान नहीं होता और अवैध शराब का खतरा बढ़ता है। आम जनता पर इसका असर है कि शराब के वैकल्पिक स्रोतों की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत कर