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स्वच्छता का श्रेय सरकार को, लेकिन सफाई कर्मचारियों को न सम्मानजनक वेतन, न सुरक्षित रोजगार : उमंग सिंघार

लेखक: Sanjida Khanam अंतिम अपडेट: 5 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
स्वच्छता का श्रेय सरकार को, लेकिन सफाई कर्मचारियों को न सम्मानजनक वेतन, न सुरक्षित रोजगार : उमंग सिंघार

नियमितीकरण, ₹25 हजार न्यूनतम वेतन और ठेका व्यवस्था खत्म करने की मांग; सीवर सफाई के दौरान 8 मौतों का मुद्दा उठाया

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की वेतन, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। 5 नवंबर को भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान का श्रेय लेने वाली सरकार शहरों को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, स्थायी रोजगार और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध नहीं करा पा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सफाई कर्मचारियों की मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग भी की।

सिंघार ने कहा कि प्रदेश के सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। भोपाल में 3 नवंबर को प्रदर्शन के बाद 4 नवंबर से प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल की घोषणा की गई है। उनके मुताबिक, सरकार स्वच्छता रैंकिंग और पुरस्कारों का श्रेय तो लेती है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के भविष्य और अधिकारों की जिम्मेदारी नहीं निभा रही है।

नियमितीकरण और ₹25 हजार न्यूनतम वेतन की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने सफाई कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगें उठाईं। उन्होंने वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और विनियमित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में न्यूनतम ₹25 हजार मासिक वेतन सुनिश्चित करने, ठेकेदारी एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर स्थायी रोजगार देने और सेवाकाल में कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार के एक पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की।

सिंघार ने वेतन के मुद्दे पर कहा कि भोपाल में सफाई कर्मचारियों को 29 दिन काम करने के बाद लगभग ₹9 हजार मिलते हैं, जबकि अन्य नगरीय निकायों में कहीं ₹7 हजार तो कहीं ₹6 हजार तक वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम राशि में कर्मचारी घर का किराया, राशन, बच्चों की फीस और परिवार के इलाज का खर्च कैसे उठाएं?

सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

सीवर सफाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए सिंघार ने बताया कि उनके अनुसार जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में सीवर सफाई के दौरान पांच घटनाओं में आठ लोगों की जान गई और चार लोग घायल हुए। उन्होंने उज्जैन की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एक व्यक्ति की मौत हुई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

उन्होंने सवाल किया कि सीवर सफाई के दौरान कर्मचारियों की जान बचाने के लिए सरकार ने क्या ठोस व्यवस्था की है। सिंघार ने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग अधिनियम, 2013 की धारा 7 सुरक्षा उपायों के बिना खतरनाक तरीके से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए लोगों को नियोजित करने पर रोक लगाती है, जबकि धारा 9 में उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सीवर सफाई के दौरान मृत्यु होने पर ₹30 लाख मुआवजे के प्रावधान का हवाला देते हुए पूछा कि अब तक कितने परिवारों को मुआवजा दिया गया और कितने मामले लंबित हैं।

हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद नियमितीकरण नीति पर सवाल

सिंघार ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चल रहे मामलों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 25 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद 21 सितंबर 2026 को युगलपीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए नीति दोबारा तैयार करने का निर्देश बरकरार रखा।

उन्होंने सवाल उठाया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति बनाने के बजाय सरकार उनके अधिकारों के मामले में अदालत में अपील क्यों कर रही है।

सम्मान के साथ अधिकार और सुरक्षित भविष्य की मांग

सिंघार ने प्रयागराज कुंभ 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर सम्मान देने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वही समाज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने वाल्मीकि समाज की आबादी और सफाई कार्य से जुड़े लोगों की संख्या के संबंध में भी आंकड़े प्रस्तुत किए।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से नियमितीकरण की समयसीमा घोषित करने, सभी नगरीय निकायों में ₹25 हजार न्यूनतम मासिक वेतन लागू करने, ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने और सेवाकाल में मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहरों को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, सुरक्षित रोजगार और बेहतर भविष्य मिलना चाहिए।

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Sanjida Khanam

Sanjida Khanam डिजिटल हिंदी पत्रकारिता के साथ सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में सक्रिय हैं।