ताज़ीपुरा बस्ती एक साल से अंधेरे में, आखिर जिम्मेदार कौन?

ट्रांसफार्मर जलता है तो ग्रामीण चंदा कर लगवाते हैं डीपी, दो दिन में फिर जवाब दे जाती है बिजली व्यवस्था
समाजसेवक रक़ीब खान साहब ने उठाई आवाज़—अब खानापूर्ति नहीं, चाहिए स्थायी समाधान ताज़ीपुरा बस्ती के रहवासी पिछले एक साल से बिजली की परेशानी झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि जब बस्ती का ट्रांसफार्मर जल जाता है, तो ग्रामीण खुद चंदा इकट्ठा करके ट्रांसफार्मर लगवाने की कोशिश करते हैं।
लेकिन विडंबना देखिए—जो ट्रांसफार्मर बड़ी मुश्किल से लगाया जाता है, वह भी महज़ एक-दो दिन में अधिक लोड के चलते जवाब दे जाता है।

सवाल यह है कि आखिर ग्रामीण कब तक अपनी जेब से पैसा लगाकर बिजली की व्यवस्था करते रहेंगे?

ताज़ीपुरा बस्ती में करीब 200 से 300 मकान हैं और पूरी बस्ती का विद्युत भार एक ही ट्रांसफार्मर पर है। रहवासियों का कहना है कि बस्ती की खपत के मुकाबले ट्रांसफार्मर की क्षमता कम है। यही वजह है कि बार-बार ट्रांसफार्मर जलने की शिकायत सामने आती है। एक साल से जारी इस समस्या के बावजूद ग्रामीणों को स्थायी निजात नहीं मिल सकी है।
ट्रांसफार्मर खराब होता है, शिकायत होती है, इंतज़ार होता है और आखिरकार ग्रामीण खुद चंदा कर व्यवस्था करने पर मजबूर हो जाते हैं। सबसे बड़ा सवाल ग्राम पंचायत की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जिम्मेदार सरपंच अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाते और बिजली विभाग के सामने मजबूती से मामला रखते, तो शायद आज बस्ती के लोगों को यह नौबत नहीं देखनी पड़ती। समाजसेवक रक़ीब खान साहब ने उठाई आवाज़ बिजली संकट से परेशान ग्रामीणों की आवाज़ को एक बार फिर समाजसेवक मिर्ज़ा रक़ीब खान साहब ने बुलंद किया है।
उन्होंने साफ़ कहा है कि अब सिर्फ़ ट्रांसफार्मर बदलने की औपचारिकता से काम नहीं चलेगा। रक़ीब खान साहब का कहना है— बस्ती के विद्युत भार का सही आकलन किया जाए। जरूरत के मुताबिक ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाए या अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाएं।
आखिर कब तक ताज़ीपुरा के लोग आसपास की बस्ती के ट्रांसफार्मर के भरोसे रहेंगे और कब तक ग्रामीण अपनी जेब से चंदा करके बिजली की व्यवस्था करते रहेंगे? रक़ीब खान साहब ने जिम्मेदारों से सवाल करते हुए कहा कि ग्रामीणों की परेशानी को महज़ अस्थायी इंतज़ाम से खत्म नहीं किया जा सकता।
बस्ती को ऐसी बिजली व्यवस्था चाहिए जो आबादी और वास्तविक लोड के मुताबिक हो। अब देखना होगा कि रक़ीब खान साहब की इस आवाज़ के बाद बिजली विभाग और ग्राम पंचायत हरकत में आती है या फिर ताज़ीपुरा के रहवासियों को एक और ट्रांसफार्मर जलने का इंतज़ार करना पड़ेगा। एक साल से जारी इस बिजली संकट ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिम्मेदार महज़ आश्वासन नहीं, बल्कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे।