तमिलनाडु CM बोले- मेरी मोटी चमड़ी, आलोचना से नहीं डरता:सच कहूं तो इससे ज्यादा की उम्मीद; DMK पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय ने गुरुवार को कहा कि उनकी ‘मोटी चमड़ी’ उन्हें आलोचना से बचाती है। उन्होंने विपक्षी DMK पर पुराने भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर आलोचना की। मदारंथकम में विजय अपनी पार्टी TVK की उम्मीदवार मरागाथम कुमारवेल के लिए प्रचार कर रहे थे। यह प्रचार 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए था।
विजय ने कहा कि DMK उन्हें बदनाम करके उनके सवालों से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबला सिर्फ TVK और DMK के बीच है। विजय बोले- DMK पर सवाल उठाओ, वे भद्दे कमेंट करते हैं TVK प्रमुख विजय ने कहा कि विपक्षी पार्टी मानती है कि युवा पीढ़ी 50 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामलों से अनजान है।
इसी वजह से DMK अपनी ‘मिस्टर क्लीन’ छवि बनाए रखती है। उन्होंने कहा, ‘जब मैं ये पुराने मामले उठाता हूं, तो वे हम पर भद्दे और बदनाम करने वाले हमले करते हैं।’ विजय बोले- स्टालिन जीते या हारें, वो मेरे अंकल हैं विजय से पूछा गया कि वह लगातार DMK प्रमुख एमके स्टालिन को निशाना क्यों बनाते हैं।
इस पर उन्होंने कहा, “कुछ लोग मेरी आलोचना करते हैं और पूछते हैं कि आप हमेशा स्टालिन साहब पर सवाल क्यों करते हैं?” उन्होंने कहा, ‘बेचारे के साथ देखिए, इस चुनाव में उनके साथ क्या हुआ। वह विपक्ष के नेता भी नहीं हैं। वह हारें या जीतें, मेरे अंकल हैं। मेरे प्यारे अंकल हैं।’ विजय बोले- ये लड़ाई अच्छाई और बुराई के बीच की है विजय ने आगामी राजनीतिक मुकाबले को फिर दो पक्षों के बीच की लड़ाई बताया।
उन्होंने कहा, ‘लड़ाई सिर्फ दो लोगों के बीच है। एक TVK की शुद्ध ताकत है और दूसरी DMK की बुरी ताकत है।’ उन्होंने चुनाव से पहले बनाए जा रहे राजनीतिक समीकरणों को भी खारिज किया। विजय ने इन्हें “बेकार जोड़-घटाव और गणित” बताया। -----------------------------
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय के ‘मोटी चमड़ी’ के बयान और DMK पर भ्रष्टाचार के आरोपों के इर्द‑गिर्द घूमती है। यह विषय राजनीतिक बहस और सत्ता के संघर्ष को उजागर करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य के प्रमुख नेताओं के बीच वैचारिक टकराव को दर्शाती है और चुनावी माहौल पर प्रभाव डाल सकती है। आम जनता पर इसका असर दो‑तरफ़ा हो सकता है: एक तरफ यह नागरिकों को राजनीतिक जवाबदेही के प्रति जागरूक कर सकता है, वहीं दूसरी ओर यह चुनावी तनाव बढ़ाकर अस्थिरता पैदा कर सकता है।