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तमिलनाडु- हाईवे बोर्ड पर हिंदी लिखने पर 2 अधिकारी सस्पेंड:तमिल-अंग्रेजी में जगहों के नाम लिखने का नियम; 2026 में तीसरी बार हिंदी शब्द मिटाए गए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
तमिलनाडु- हाईवे बोर्ड पर हिंदी लिखने पर 2 अधिकारी सस्पेंड:तमिल-अंग्रेजी में जगहों के नाम लिखने का नियम; 2026 में तीसरी बार हिंदी शब्द मिटाए गए

तमिलनाडु सरकार ने शुक्रवार को नेशनल हाईवे साइनबोर्ड पर हिंदी लिखने के मामले में दो असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया। मामला तूतीकोरिन के सत्तानकुलम-नाजरेथ स्टेट हाईवे (SH-93) का है, जहां नए साइनबोर्ड पर तमिल और अंग्रेजी के साथ कस्बों के नाम हिंदी में भी लिखे गए थे। तमिलनाडु सरकार के मुताबिक यह राज्य की दो-भाषा नीति का उल्लंघन है।

हिंदी हटाने के साथ दोनों अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। 2026 में हिंदी में लिखे नाम मिटाने का तीसरा मामला है। इससे पहले मार्च में तिरुचिरापल्ली डिविजनल रेलवे ऑफिस के नए भवन के एंट्री गेट पर लिखा कर्तव्य द्वार मिटाया गया था। मार्च में ही सिंगानल्लूर रेलवे स्टेशन पर हिंदी में लिखे सिंगानल्लूर को द्रविड़ियन दलों के कार्यकर्ताओं ने काला कर दिया था।

तमिलनाडु की 'टू-लैंग्वेज फॉर्मूला' पॉलिसी NH-SH पर साइनबोर्ड के नियम नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के नियमों में अंतर हो सकता है। राज्य अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों के लिए अपनी भाषा नीति लागू कर सकता है। इसके अलावा कई राज्यों में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साइनबोर्ड के लिए स्थानीय भाषा के नियम हैं।

जैसे पंजाब में पंजाबी और कर्नाटक में कन्नड़ के इस्तेमाल को स्थानीय कानूनों के तहत जरूरी किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। तमिलनाडु में भाषा आंदोलन का इतिहास तमिलनाडु में हिंदी के विरोध का इतिहास पुराना है। 1937 में स्कूलों में हिंदी अनिवार्य किए जाने के विरोध में पेरियार और जस्टिस पार्टी ने आंदोलन किया।

1965 में हिंदी को देश की एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने के विरोध में बड़े छात्र आंदोलन हुए। इसके बाद भाषा तमिलनाडु की राजनीति और पहचान का अहम मुद्दा बन गई। इसी दौर में द्रविड़ राजनीति मजबूत हुई और राज्य में तमिल-अंग्रेजी की दो-भाषा नीति को महत्व मिला। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- क्लास 6 से 3-लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी, इस साल तीसरी भाषा में स्टूडेंट्स फेल नहीं किए जाएंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBSE की छठी कक्षा के छात्रों को 3-लैंग्वेज पॉलिसी से छूट दी जाए।

कोर्ट का यह आदेश 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाए। यानी अगले साल क्लास 6 में जा रहे स्टूडेंट्स को राहत मिलेगी। लेकिन अभी जो स्टूडेंट्स छठी क्ल

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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