राजनीति

तमिलनाडु: TVK गठबंधन-डीएमके का ECI मीटिंग से वॉकआउट, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ पर अड़े

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
तमिलनाडु: TVK गठबंधन-डीएमके का ECI मीटिंग से वॉकआउट, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ पर अड़े

तमिलनाडु में भी एसआईआर विवाद को लेकर घमासान जारी है.

शुक्रवार (23 अक्टूबर) को राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक के साथ विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) को लेकर सर्वदलीय बैठक से सत्ता पर काबिज टीवीके गठबंधन समेत विपक्ष की डीएमके के प्रतिनिधियों ने भी वॉकआउट कर दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की.

HT की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय सरकार में मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने मीटिंग से वॉकआउट के बाद कहा कि एसआईआर के विरोध में टीवीके शुरुआत से हैं.

उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर यह ऐसा नहीं किया गया होता तो बीते तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी 160 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करती.'

'इस्तीफा दें ज्ञानेश कुमार'

एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें बहुत सारी गड़बड़ियां हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की इसकी जिम्मेदारी लेने की मांग करते हुए उन्होंने इस्तीफे की मांग की.

निर्मल कुमार ने दो टूक कहा कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष कराए जाएं.

DMK ने भी एसआईआर पर उठाए सवाल

उधर, डीएमके के कानूनी विभाग के सचिव आई परंथमन ने भी एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते कहा कि चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि तमिलनाडु में 74 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए.

उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव अधिकारी के सामने अपनी बात रखने के बाद हम बैठक से बाहर चले गए.'

17 राज्यों में SSR

इलेक्शन कमीशन ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट की SSR का आदेश दिया है, इसके लिए 1 जनवरी पात्रता तिथि तय की गई है. SSR, SIR से अलग प्रक्रिया है, जिस पर विवाद देखने को मिल रहा है.

एसआईआर में मतदाता सूची को शुरू से फिर से बनाया जाता है. एसएसआर में क्रमिक सुधार किए जाते हैं. यह वार्षिक रूप से किया जाना चाहिए.

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

तमिलनाडु में चुनावी प्रक्रियाओं पर विवाद के बीच टीवीके गठबंधन और डीएमके ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ बैठक से वॉकआउट किया, और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। यह घटना चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, क्योंकि यह दिखाती है कि राजनीतिक दलों का चुनाव आयोग पर कितना प्रभाव है। यदि आयुक्त इस्तीफा देते हैं तो चुनावी निरीक्षण कमजोर हो सकता है, जिससे मतदाताओं को भरोसेमंद चुनावी प्रक्रिया की कमी महसूस होगी और चुनावी धांधली का जोखिम बढ़ सकता है।

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