Tata Group: 158 साल के साम्राज्य में चेयरमैन की कुर्सी पर टकराव, आखिर चल क्या रहा है?
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
टाटा ग्रुप में टाटा संस के चेयरमैन पद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है.
गुरुवार को टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया है.
यह फैसला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि अगस्त में चंद्रशेखरन ने खुद कहा था कि वे फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन बनने की पेशकश नहीं करेंगे लेकिन अब कहानी पूरी तरह बदल गई है.
बोर्ड की नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने सितंबर में चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था.
गुरुवार की बोर्ड बैठक में उन्होंने इस अनुरोध को स्वीकार किया और बोर्ड ने बहुमत से उनके पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दे दी.
नोएल टाटा ने किया विरोध, फैसले को बताया गैरकानूनी
मिली जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट्स और नोएल टाटा की आपत्ति सामने आई है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है.
नोएल टाटा जो टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और बोर्ड में ट्रस्ट्स के नामित निदेशक हैं ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया.
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि यह प्रस्ताव गैरकानूनी और कानूनी रूप से अमान्य है.
ट्रस्ट्स का तर्क है कि चंद्रशेखरन पहले ही दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला कर चुके थे और ट्रस्ट्स ने उनके फैसले को स्वीकार करते हुए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी.
यानी अब विवाद सिर्फ चेयरमैन की नियुक्ति तक सीमित नहीं है.
सवाल यह भी है कि बोर्ड का यह फैसला आगे शेयरहोल्डर्स और कानूनी स्तर पर किस तरह चुनौती दिया जाता है.
ये भी पढ़ें: 5 मिनट की Google Meet और 80 भारतीय लोग Fired, अमेरिकी फर्म का क्रूर तरीका
एक तरफ चंद्रशेखरन - दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स
<p styl
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar