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टेंडर घोटाले के बाद केयरटेकर विभाग में भ्रष्टाचार:परिवार-सहकर्मियों संग फर्म बनाकर फर्जी किया भुगतान, खानपान में 8 महीने में 73 लाख खर्च

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
टेंडर घोटाले के बाद केयरटेकर विभाग में भ्रष्टाचार:परिवार-सहकर्मियों संग फर्म बनाकर फर्जी किया भुगतान, खानपान में 8 महीने में 73 लाख खर्च

कानपुर नगर निगम में टेंडर घोटालों और आउटसोर्सिंग भर्ती में गड़बड़ी के मामलों के बाद भ्रष्टाचार के नए-नए मामले खुलासे हो रहे हैं। अब केयरटेकर विभाग में वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर जांच शुरू हो गई है। आरोप है कि केयरटेकर ने अपने पारिवारकि और सहकर्मियों के साथ मिलकर फर्म बनाई और सरकारी धन का बंदरबांट किया।

सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर फर्म बनाकर फर्जी बिलों के जरिए भुगतान कराने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी ने नगर आयुक्त को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए पत्र भेजा है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने अपर नगर आयुक्त प्रथम को मामले की जांच सौंपी है।

खानपान में 8 महीने में 73 लाख खर्च सेवाग्राम कॉलोनी, दादानगर निवासी राकेश मिश्र ने मुख्यमंत्री से केयरटेकर विभाग में अनियमितताओं की शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि केयरटेकर खुद अथवा परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर फर्म चला रहे हैं और इसी फर्म के माध्यम से फर्जी बिल के आधार पर भुगतान करा रहे हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि केवल खानपान में 8 महीने के दौरान करीब 73 लाख रुपए खर्च किए गए। एक कंपनी के नाम पर खरीदारी किए जाने का भी आरोप है। इस मामले की विजिलेंस जांच कराने की मांग की गई है। कागजों में लग गए सबमर्सिबल पंप शिकायत में पूर्व केयरटेकर के कार्यकाल में हुए कामों में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।

कई स्थानों पर कागजों में सबमर्सिबल पंप लगाए गए और उनका भुगतान भी कर दिया गया, जबकि मौके पर स्थिति अलग होने की बात कही गई है। इसके अलावा अधिकारियों पर एडवांस राशि अपने खातों में लेकर विकास कार्य कराने का आरोप भी लगाया गया है। नगर निगम अब पिछले 8 सालों में केयरटेकर विभाग में हुए नए और पुराने कार्यों की जांच करा रहा है।

इसमें खरीदारी, भुगतान, फर्मों और कराए गए विकास कार्यों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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