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तिब्बत की निर्वासित सरकार बोली-लद्दाख से तुलना बेबुनियाद:हकीकत कुछ और; वांगचुक ने कहा था- चीन ने तिब्बत का ऐसा दमन नहीं किया, जैसा हमारा हुआ

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
तिब्बत की निर्वासित सरकार बोली-लद्दाख से तुलना बेबुनियाद:हकीकत कुछ और; वांगचुक ने कहा था- चीन ने तिब्बत का ऐसा दमन नहीं किया, जैसा हमारा हुआ

सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने सोनम वांगचुक के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें वांगचुक ने लद्दाख के हालात की तुलना तिब्बत से की थी। CTA के प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि यह तुलना गलत और हकीकत से परे है। वांगचुक का बयान चीन के सत्तावादी शासन में तिब्बतियों की स्थिति नहीं दिखाता।

वांगचुक ने लेह में 24 सितंबर 2025 में हुई हिंसा की पहली बरसी पर एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। कार्यक्रम लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन ने आयोजित किया था। इसमें वांगचुक ने 2019 से लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना की। वांगचुक ने कहा था- CTA ने तुलना को गलत बताया तिब्बती निर्वासित सरकार CTA ने अब लद्दाख और तिब्बत की स्थिति की तुलना पर गहरी चिंता जताई है।

तिब्बती सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि तिब्बत अब भी चीन के सत्तावादी शासन के अधीन है। वहां तिब्बतियों को उनके मूल अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत की अलग सांस्कृतिक पहचान मिटाने के उद्देश्य से उठाए जा रहे कदम भी लगातार तेज किए जा रहे हैं।

------------------------------------------- वांगचुक से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… वांगचुक ने CJP के विदेशी कनेक्शन के आरोप खारिज किए: बोले- 94% फॉलोअर्स भारत से; जांच के लिए तैयार, विदेशी फंडिंग नहीं ली एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़े विदेशी कनेक्शन के आरोपों को खारिज किया है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अमेरिका में बड़ी संख्या में समर्थन मिलने की बात कही जा रही थी। इसके बाद उन्होंने CJP के सोशल मीडिया फॉलोअर्स के डेटा का विश्लेषण किया। उनके मुताबिक, करीब 94% फॉलोअर्स भारत से थे, जबकि सिर्फ 6% दूसरे देशों से थे। पढ़ें पूरी खबर…

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

तिब्बत की निर्वासित सरकार ने लद्दाख से तुलना कर विवाद खड़ा किया, जबकि केंद्रीय तिब्बतन प्रशासन ने इस बात को गलत बताया। यह घटना चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना को बढ़ा रही है। यदि इस तुलना को स्वीकार किया गया, तो यह तिब्बती और लद्दाखी समुदायों के बीच तनाव बढ़ा सकता है और दोनों क्षेत्रों में राजनीतिक व सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है।

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