ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए नई उम्मीद: जानिए बेंगलुरु की बेला जोशी और उनकी ‘Dynamic Behaviour Therapy’ की कहानी
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न्यूरोडायवर्जेंट (Neurodivergent) बच्चों, विशेषकर Autism Spectrum Disorder (ASD) से पीड़ित बच्चों का पालन-पोषण किसी भी परिवार के लिए एक चुनौतीपूर्ण यात्रा होती है।
भारत में ऑटिज्म को लेकर जागरूकता की कमी, सामाजिक संकोच और पारंपरिक थेरेपी तकनीकों की rigid (कठोर) सीमाओं के कारण कई बच्चे समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़ जाते हैं। इसी पुरानी सोच को बदलने और ऑटिस्टिक बच्चों को जीवन में आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया है बेंगलुरु की स्पेशल एजुकेटर बेला जोशी (Bela Joshi) ने।
अपने संस्थान ‘Colours Centre for Learning and Development’ के माध्यम से वे पिछले दो दशकों से अधिक समय से ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों और उनके परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल रही हैं। ‘Colours’ सेंटर की शुरुआत और बेला जोशी का विजन बेला जोशी ने जब दो दशक पहले स्पेशल एजुकेशन (Special Education) के क्षेत्र में कदम रखा, तो उन्होंने गहराई से महसूस किया कि हर बच्चा अद्वितीय होता है।
उनकी सीखने की क्षमता, प्रतिक्रियाएं और जरूरतें एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न होती हैं। इसलिए, एक ही rigid या एक-समान थेरेपी मॉडल को सभी ऑटिस्टिक बच्चों पर जबरन लागू नहीं किया जा सकता। इसी सोच के साथ उन्होंने बेंगलुरु में Colours Centre for Learning and Development की नींव रखी।
इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल कुछ बुनियादी कौशल सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें भावनात्मक (emotional), सामाजिक (social) और व्यावहारिक (behavioral) रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे दैनिक जीवन के कार्यों को बिना किसी पर निर्भर रहे स्वयं पूरा कर सकें। क्या है Dynamic Behaviour Therapy (DBT)?
पारंपरिक Applied Behavior Analysis (ABA) थेरेपी अक्सर रिपीटिटिव टास्क (बार-बार दोहराए जाने वाले कार्यों) और रिवॉर्ड सिस्टम पर आधारित होती है। इसके विपरीत, बेला जोशी ने Dynamic Behaviour Therapy (DBT) का एक अनोखा ढांचा तैयार किया है, जो बच्चों के मानसिक विकास पर अधिक प्रभावी साबित हो रहा है।
अभिभावकों को सशक्त बनाना: थेरेपी का सबसे अहम हिस्सा बेला जोशी का स्पष्ट मानना है कि किसी भी थेरेपिस्ट का काम केवल सेंटर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हो सकता। जब तक माता-पिता को सही मार्गदर्शन और ट्रेनिंग नहीं मिलेगी, तब तक बच्चे के व्यवहार में स्थायी और सकारात्मक बदलाव नहीं आ सकता।
मुख्य अंतर: पारंपरिक ABA थेरेपी बनाम Dynamic Behaviour Therapy विशेषता (Feature) पारंपरिक ABA थेरेपी Dynamic Behaviour Therapy (DBT) दृष्टिकोण (Approach) नियम-आधारित और मानकीकृत लचीला और बाल-केंद्रित (Child-centric) मुख्य फोकस (Primary Focus) केवल व्यवहार को नियंत्रित करना भावनात्मक जुड़ाव और आत्म-नियंत्रण (Self-regulation) सीखने का माहौल क्लिनिकल एवं नियंत्रित माहौल व्यावहारिक, स्वाभाविक और सामाजिक माहौल अभिभावकों की भूमिका सीमित भागीदारी सक्रिय, प्रशिक्षित और निरंतर भागीदार समावेशी भारत की ओर एक बड़ा कदम बेला जोशी और उनका ‘Colours’ सेंटर यह साबित करता है कि सही सहानुभूति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और Dynamic Behaviour Therapy के माध्यम से ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे न केवल समाज में अपनी पहचान बना सकते हैं, बल्कि अपनी अंतर्निहित क्षमताओं का पूर्ण विकास भी कर सकते हैं।
उनका यह प्रयास न्यूरोडायवर्सिटी (Neurodiversity) को स्वीकार करने और एक समावेशी भारत (Inclusive India) के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर है। The post ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए नई उम्मीद: जानिए बेंगलुरु की बेला जोशी और उनकी ‘Dynamic Behaviour Therapy’ की कहानी appeared first on See Positive .
📡 स्रोत: NewsData.io
💡 पृष्ठभूमि (Background)
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए नई उम्मीद: बेंगलुरु की बेला जोशी और उनकी Dynamic Behaviour Therapy की कहानी एक महत्वपूर्ण विषय है। यह विषय न्यूरोडायवर्जेंट बच्चों के लिए वैकल्पिक उपचार विधियों पर प्रकाश डालता है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में ऑटिज्म के प्रति जागरूकता कम है और पारंपरिक थेरेपी सीमित हैं, जिससे कई बच्चे समाज से अलग हो जाते हैं। इस नई थेरेपी से माता-पिता और समाज को यह समझने में मदद मिलती है कि ऑटिस्टिक बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रचनात्मक और व्यक्तिगत दृष्टिकोण आव