टिकाऊ खेती को मिलेगा नया आधार
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प्राकृतिक संसाधन संरक्षण आधारित कृषि से टिकाऊ खेती को मिलेगा नया आधारजोबनेर, 6 अक्टूबर। बदलती जलवायु, घटती मृदा उर्वरता और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच प्राकृतिक संसाधन संरक्षण आधारित कृषि को टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। इसी विषय को लेकर श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में अनुसंधान निदेशालय एवं सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बिज़नेस, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “प्राकृतिक संसाधन संरक्षण आधारित कृषि का विस्तार—चुनौतियां एवं अवसर” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने ऑनलाइन माध्यम से की। उन्होंने कहा कि कृषि का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि पौष्टिक, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन के साथ मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने टिकाऊ कृषि के लिए किसान, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र के देश प्रतिनिधि डॉ. महेश गठाला ने प्राकृतिक संसाधन संरक्षण आधारित कृषि को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने किसानों को बेहतर बाजार व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
पूर्व निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. माधुरी जोशी ने प्राकृतिक संसाधन संरक्षण आधारित कृषि को पारिवारिक पोषण से जोड़ते हुए फसल विविधता, स्थानीय खाद्य संसाधनों और कृषि में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य, कार्बन प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, महिला सहभागिता तथा किसान-वैज्ञानिक-उद्योग साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि मॉडल विकसित करने और किसानों के पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में अनुसंधान निदेशक डॉ. उम्मेद सिंह, सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बिज़नेस के अमित सिंह एवं रजत, अधिष्ठाता एवं संकायाध्यक्ष डॉ. एल. आर. यादव, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. शैलेश गोदिका, अधिष्ठाता एवं संकायाध्यक्ष डेयरी डॉ. बी. एल. जाट, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय झिलाई डॉ. आर. एस. मीणा, विभागाध्यक्षों और वैज्ञानिकों सहित करीब 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रोशन चौधरी ने किया। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले अतिथियों, वैज्ञानिकों, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।