राज्य

तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों को अपराध स्थल से साक्ष्य संकलन, संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण, आधुनिक अपराध अनुसंधान तकनीकों, फॉरेंसिक साइंस तथा डिजिटल टूल्स के व्यावहारिक उपयोग के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे अपराधों की अनुसंधान एवं विवेचना तार्किक व वैज्ञानिक साक्ष्यों से परिपूर्ण हो सके और दोषसिद्धि दर (कन्विक्शन रेट) में वृद्धि हो सके।

कार्यशाला में राज्य के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। कार्यशाला का शुभारंभ 01 सितंबर को प्रातः 10 बजे हुआ, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षण की रूपरेखा पर विस्तृत परिचर्चा की और प्रतिभागियों को कार्यशाला के उद्देश्यों से अवगत कराया।

डायरेक्टर फिंगर प्रिंट शाखा श्री मनोज राजपुत ने चांस प्रिंट (घटनास्थल पर मिलने वाले अस्पष्ट अंगुल चिन्ह) को विकसित करने की आधुनिक विधियों, घटनास्थल निरीक्षण एवं जब्ती प्रक्रिया, विवादित दस्तावेजों में अंगुल चिन्ह की जाँच, इंकलेस पैड व लाइव स्कैनर के माध्यम से सर्च स्लिप तैयार करने की प्रक्रिया, तथा NAFIS एवं MCU प्रणाली से जुड़े विधिक प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी।

पुलिस अधीक्षक सीआईडी ऋतुराज गुप्ता ने प्रश्नगत दस्तावेज परीक्षण (भाग-1) के अंतर्गत आधुनिक आपराधिक न्याय परिदृश्य में प्रश्नगत दस्तावेजों के महत्व, उनके वर्गीकरण एवं परीक्षण, संदेहास्पद अभिलेखों की जब्ती तथा परीक्षण के आधारभूत सिद्धांतों को समझाया।

श्री गुप्ता ने प्रश्नगत दस्तावेज परीक्षण के द्वितीय भाग में हस्ताक्षर एवं हस्तलेख मिलान, कूटरचित (जाली) दस्तावेजों की पहचान, मानक तुलनात्मक नमूने एकत्र करने की विधि तथा संबंधित केस स्टडीज पर व्यावहारिक जानकारी दी।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।