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TMC पर ले सकता चुनाव आयोग बड़ा फैसला, ममता बनर्जी-ऋतब्रत को बुलाया दिल्ली दफ्तर

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
TMC पर ले सकता चुनाव आयोग बड़ा फैसला, ममता बनर्जी-ऋतब्रत को बुलाया दिल्ली दफ्तर

तृणमूल कांग्रेस में टूट के मामले और दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के नेताओं को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं.

चुनाव आयोग ने बुधवार को टीएमसी के दोनों नेताओं ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी (बागी गुट) को पत्र लिखा है.

इसमें 12 सितंबर को सुबह 11 बजे और 12 बजे (अलग-अलग समय पर) 5-5 सदस्यों के साथ आयोग के समक्ष पक्ष रखने की कहा है.

केंद्रीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को लिखे लेटर में कहा, 'आयोग ने पश्चिम बंगाल, मेघालय, और त्रिपुरा में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा के लिए पांच सदस्यी प्रतिनिधिमंडल के साथ मीटिंग करने का फैसला लिया है.

यह मीटिंग 12 सितंबर को सुबह 11 बजे दिल्ली के द्वारका स्थित IIIDEM में होगी.'

इसके अलावा चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को भी उसी दिन दोपहर 12 बजे दिल्ली में मीटिंग के लिए समय दिया है.

नंदीग्राम और रेजीनगर में होना है उपचुनाव

इधर, पूरा मामला नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से जुड़ा है.

यह चुनाव टीएमसी के भविष्य को तय कर सकता है. माना जा रहा है कि इससे उनके चुनाव चिन्ह पर भी असर पड़ सकता है.

आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामांकन की तारीख 16 सितंबर तय है. ऐसे में चुनाव आयोग के पास इस विवाद को सुलझाने के लिए काफी कम समय है.

आयोग ने अभी टीएमसी का चुनाव चिन्ह और नाम फ्रीज नहीं किया है.

इस पूरे मामले पर बागी टीएमसी के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो बागी गुट उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा.

वहीं, चुनाव चिन्ह के बारे में दत्ता ने कहा, 'पार्टी को भारत निर्वाचन आयोग से चुनाव चिन्ह मिलने का भरोसा है. उसने सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है.'

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📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो प्रमुख नेताओं, ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, के बारे में है, जिन्हें चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनाव से पहले पक्ष रखने के लिए बुलाया है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजनीतिक दल के भीतर के विभाजन और चुनावी रणनीति को उजागर करता है, जिससे पार्टी की एकता और चुनावी प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि यदि दल का विभाजन बढ़ता है तो मतदाता भ्रमित हो सकते हैं और चुनावी परिणामों में अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे राजनीतिक स्थिरता पर प्रश्न उठ

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