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ट्राइफेड की पहल पर रांची में आयोजित आदि बाजार और आदि चित्रा में पारंपरिक उत्पादों को मिला मंच

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ट्राइफेड की पहल पर रांची में आयोजित आदि बाजार और आदि चित्रा में पारंपरिक उत्पादों को मिला मंच

ट्राइफेड की पहल पर रांची में सात दिवसीय आदि बाजार और आदि चित्रा का आयोजन, विभिन्न राज्यों से पहुंचे कारीगर और कलाकार, स्थानीय कारीगरों को भी मिला बड़ा बाजार, आदिवासी हस्तशिल्प, वस्त्र, कला और चित्रकारी, प्राकृतिक उत्पाद एवं आदिवासी संस्कृति को मिला मंच।

Short Headline: ट्राइफेड की पहल पर रांची में आयोजित आदि बाजार और आदि चित्रा में पारंपरिक उत्पादों को मिला मंच

आदि मेला, रांची, डीडी

ट्राइफेड की पहल पर आदि बाजार और आदि चित्रा का आयोजन

सात दिवसीय प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों से पहुंचे कारीगर

स्थानीय कारीगरों को भी मिला बड़ा बाजार बांस और लोहे के उत्पादों की दिखी मांग

एंकर ट्राइफेड की ओर से रांची के ऑड्रे हाउस में सात दिवसीय आदि बाजार और आदि चित्रा का आयोजन किया गया है। इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कारीगरों ने पारंपरिक हस्तशिल्प और उत्पादों के स्टॉल्स लगाए हैं। इनमें झारखंड के भी पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल्स शामिल हैं।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. रांची के ऑड्रे हाउस में जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ, ट्राइफेड की ओर से आयोजित आदि बाजार और आदि चित्रा में स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को बड़ा मंच मिला है। गुमला जिला से आई बांस कारीगर कविता कुमारी ने बताया कि उन्हें पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ मिला है, जिससे उन्हें कारोबार बढ़ाने में मदद मिली।

बाइट- कविता कुमारी, बांस कारीगर

वीओ 02. यहां आदिवासी हस्तशिल्प, वस्त्र, कला और चित्रकारी, प्राकृतिक उत्पाद एवं आदिवासी संस्कृति लोगों को आकर्षित कर रही है। उपराजधानी दुमका में भी बांस की कारीगरी का कारोबार फल-फूल रहा है। दुमका से आए सुजल हांसदा ने बताया कि उन्हें पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ मिला है, जिससे वो पारंपरिक कारोबार को आगे बढ़ा हैं।

बाइट- सुजल हांसदा, बांस कारीगर

वीओ 03. इस मेले में पारंपरिक लोहे के हथियार और बर्तनों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है। लोहरदगा जिले से पहुंचे सुकेश लोहरा ने बताया कि ट्राइफेड के माध्यम से उन्हें बड़ा बाजार उपलब्ध हुआ है। साथ ही पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद टूल कीट भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे कारोबार फल-फूल रहा है।

बाइट- सुकेश लोहरा, लोहा कारीगर

अंतिम वीओ आदि बाजार और आदि चित्रा के जरिए जनजातीय कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर और उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। ऐसे आयोजन जनजातीय कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

डीडी न्यूज़ के लिए रांची से सहयोगी विकास कुमार के साथ प्रणय प्रबोध की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।