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अब ट्रंप ने बदल दिया कनाडा के लेक का नाम, तनाव के बीच फैसला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 26 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अब ट्रंप ने बदल दिया कनाडा के लेक का नाम, तनाव के बीच फैसला

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक और सीमा विवाद चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है, जिसने दुनिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

ट्रंप ने सोशल ट्रूथ पर पोस्ट कर कहा कि वह ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं. लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बॉर्डर पर स्थित है.

अमेरिका राष्ट्रपति का ये बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों ने ट्रेड टेंशन को लेकर एक-दूसरे पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. ओंटारियो में कनाडा का ऑटो इंडस्ट्री हब न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका को अब ओंटारियो के साथ बहुत ज्यादा व्यापार की उम्मीद नहीं है, इसलिए यह कदम (नाम बदलने की) उठाया जा सकता है. ट्रंप ने पिछले साल एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कर दिया था.

ओंटारियो कनाडा का सबसे ज्यादा आबादी वाला प्रांत है और वहां का ऑटो इंडस्ट्री यहीं है. अमेरिका ने कनाडा पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया कनाडा और अमेरिका के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब पिछले हफ्ते दोनों देशों से बीच वार्ता टूट गई. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया.

इसके जवाब में कनाडा भी मंगलवार (25 अगस्त 2026) को जवाबी कार्रवाई की घोषणा करने की तैयारी में है. ट्रंप ने 24 अगस्त को कनाडाई नेताओं को बात मानने की चेतावनी देते हुए कहा था कि ऐसा न करने पर उन्हें मौजूदा टैरिफ से भी बहुत बुरे नतीजों का सामना करना पड़ेगा.

उन्होंने कनाडाई वाहनों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर भी नए 50 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है. कनाडा का यूएस पर बड़ा आरोप इसके जवाब में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वाशिंगटन पर कनाडा को अपने अधीन करने की कोशिश का आरोप लगाया है.

फ्रेंच भाषा में कार्नी ने कहा, 'बातचीत के दौरान हमें पता चला कि अमेरिकी हमारे ऑटो, स्टील और एल्युमीनियम जैसे प्रमुख उद्योगों को तबाह करना चाहते हैं.

यही मुख्य वजह थी कि हमने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया, क्योंकि वह एक खराब डील थी.' उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा अमेरिका की 'सब्सिडियरी' (सहायक कंपनी) की तरह व्यवहार स्वीकार नहीं करेगा.

कार्नी ने संकेत दिया कि कनाडा अब अमेरिका के बराबर टैरिफ लगाने के बजाय अपने श्रमिकों और व्यवसायों की सुरक्षा के लिए सटीक कार्रवाई करेगा. अमेरिका और कनाडा के बीच दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक संबंध है. दोनों देशों के बीच ऑटो, एनर्जी, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों की सप्लाई चेन आपस में जुड़ी हुई है.

📡 स्रोत: NewsData.io

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