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ट्रंप के दबाव के बाद G7 देशों में बनी सहमति, इमरजेंसी रिजर्व से जारी करेंगे 10 करोड़ बैरल तेल और डीजल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ट्रंप के दबाव के बाद G7 देशों में बनी सहमति, इमरजेंसी रिजर्व से जारी करेंगे 10 करोड़ बैरल तेल और डीजल

ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए G7 देशों में अपने रणनीतिक आपातकालीन भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल बाजार में उतारने पर सहमति बन गई है.

इसके साथ ही सदस्य देशों ने ऊर्जा के निर्यात पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाने का भी आश्वासन दिया है.

बता दें कि जी7 देशों ने ये फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बनाए गए दबाव के बाद लिया है.

ट्रंप प्रशासन कर रहा तेल की कीमतें कम करने की कोशिश बता दें कि ट्रंप प्रशासन की कोशिश है कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की ऊंची कीमतों को कुछ हद तक कम किया जाए.

हालांकि, नए फैसले के तहत जारी होने वाले तेल में कितना हिस्सा मार्च में हुए पिछले समझौते के तहत बचे भंडार से आएगा, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

G7 के इस कदम का उद्देश्य बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना माना जा रहा है.

G7 देशों की बैठक में लिया गया फैसला बता दें कि आपातकालीन भंडार से डीजल और कच्चा तेल जारी करने का फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में हुई G7 नेताओं की वर्चुअल बैठक में लिया गया.

बैठक के बाद मैक्रों ने कहा कि देशों की संयुक्त कार्रवाई का लक्ष्य ऊर्जा बाजारों को स्थिरता देना और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के दबाव को कम करना है. 20 दिनों में बाजार में आएगा सबसे ज्यादा डीजल इस बार जारी किए जाने वाले भंडार में डीजल की हिस्सेदारी अहम होगी.

योजना के मुताबिक शुरुआती करीब 20 दिनों में ही बड़ी मात्रा में डीजल बाजार तक पहुंच सकता है. G7 देशों और उनके सहयोगियों ने इस प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने पर सहमति जताई है.

ऊर्जा सप्लाई बनाए रखने पर जोर बैठक में G7 देशों ने ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई. समूह के देशों ने आपसी निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने की बात भी कही है.

इसके अलावा तेल उत्पादक देशों से ऐसे किसी कदम से बचने का आग्रह किया गया है, जिससे पहले से दबाव झेल रहे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़े.

बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में कटौती के चलते खास तौर पर डीजल बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है.

डीजल बाजार पर अभी भी दबाव कच्चे तेल की आपूर्ति में कुछ सुधार के बावजूद रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक रिफाइंड उत्पादों, विशेष रूप से डीजल बाजार अभी भी दबाव में है.

आईईए के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने जी7 नेताओं को बताया कि मार्च 2026 में की गई सामूहिक कार्रवाई के तहत घोषित 400 मिलियन बैरल में से लगभग 325 मिलियन बैरल अब तक बाजार में जारी किया जा चुका है.

यानी पूर्व निर्धारित मात्रा का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा इस्तेमाल में आ चुका है.

रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश G7 के नए प्लान में सिर्फ रणनीतिक भंडार से तेल निकालना ही शामिल नहीं है.

बल्कि देशों ने रिफाइनरी क्षमता को बेहतर ढंग से उपलब्ध कराने के लिए भी कदम उठाने पर सहमति जताई है.

जिसके तहत रिफाइनरियों के मेंटेनेंस कार्यक्रमों में आपसी तालमेल बढ़ाया जाएगा, ताकि एक ही समय पर बड़ी संख्या में रिफाइनरियों के बंद होने से बाजार में सप्लाई का संकट पैदा न हो.

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बता दें कि यह कदम अमेरिका की ओर से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति बढ़ाने की मांग और कुछ देशों के संभावित निर्यात प्रतिबंधों से यूरोपीय बाजार पर पड़ने वाले असर की चिंताओं के बीच सामने आया है.

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📡 स्रोत: NewsData.io

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