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ट्रंप ने दी इस ताकतवर देश को धमकी, जानें क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति की नाराजगी की वजह

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ट्रंप ने दी इस ताकतवर देश को धमकी, जानें क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति की नाराजगी की वजह

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया को सीधी चेतावनी दे डाली है. मामला अलास्का में बन रहे एक विशाल गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से जुड़ा है.

बता दें इस प्रोजेक्ट में दक्षिण कोरिया को भी शामिल होना है, लेकिन वह अभी तक इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाया है और इसी देरी पर ट्रंप ने नाराज हैं. ट्रंप ने दक्षिण कोरिया को आखिर क्या धमकी दी?

व्हाइट हाउस में मरीन वन में सवार होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप को बताया गया कि दक्षिण कोरिया ने अभी तक अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर दस्तखत नहीं किए हैं और वह अब भी इस पर विचार कर रहा है तो ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि अगर उन्होंने जल्द साइन नहीं किया तो वे कीमत दोगुनी कर देंगे। यह पूरी बातचीत कैसे शुरू हुई?

एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि दक्षिण कोरिया ने अभी तक अलास्का पाइपलाइन डील को मंजूरी नहीं दी है और वह इसका अध्ययन कर रहा है तो क्या उन्होंने कहीं जल्दबाजी तो नहीं कर दी.

इस पर ट्रंप ने पहले कहा कि उन्होंने कोई जल्दबाजी नहीं की और अगर दक्षिण कोरिया इसमें शामिल नहीं होना चाहता तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.

लेकिन जैसे ही पत्रकार ने दोहराया कि सियोल ने अभी इस पर दस्तखत नहीं किए हैं ट्रंप का सुर बदल गया और उन्होंने अपने बयान देते हुए कीमत दोगुनी करने की बात कह दी. आखिर यह अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट है क्या?

अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार यह एक विशाल प्राकृतिक गैस परियोजना है जिसके तहत अलास्का के उत्तरी इलाके नॉर्थ स्लोप से करीब 1300 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए गैस को दक्षिणी अलास्का तक लाया जाएगा.

जहां इसे लिक्विफाई कर जहाजों के जरिए एशियाई देशों को निर्यात किया जाएगा. बता दें इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 44 अरब डॉलर आंकी गई है. दक्षिण कोरिया को इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए क्यों कहा जा रहा है?

जानकारी के मुताबिक अमेरिका लगातार जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई सहयोगियों पर इस प्रोजेक्ट में बड़ा निवेश करने का दबाव बना रहा है.

दरअसल अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है और एशियाई देश पहले से ही बड़ी मात्रा में अमेरिकी एलएनजी आयात करते रहे हैं.

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट टैरिफ से जुड़ी बातचीत को आसान बनाने और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद व्यापारिक समझौता बनाने में मदद कर सकता है.

Trump warns Seoul over Alaska pipeline Read @ANI Story | https://t.co/PbFUMdrfxt #UnitedStates #Trump #Seoul #AlaskaPipeline pic.twitter.com/yNw7EpZTZl — ANI Digital (@ani_digital) October 3, 2026 क्या दक्षिण कोरिया इस डील से पूरी तरह इनकार कर रहा है?

दक्षिण कोरिया पहले ही अमेरिका के साथ 350 अरब डॉलर के निवेश को लेकर सहमति जता चुका है और अलास्का एलएनजी प्रोजेक्ट को इसी बड़े निवेश ढांचे का हिस्सा माना जा रहा है.

मीडिया में हाल ही में ऐसी भी खबरें आई थीं कि दक्षिण कोरिया अगस्त या सितंबर के आसपास इस डील को लेकर औपचारिक ऐलान कर सकता है लेकिन अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है. क्या जापान और ताइवान भी इसमें शामिल हो रहे हैं?

ट्रंप पहले ही दावा कर चुके हैं कि जापान सरकार इस प्रोजेक्ट में शामिल होगी और इसके लिए वह अपने उस 550 अरब डॉलर के फंड का इस्तेमाल कर सकता है जिसका खुलासा जापान ने अमेरिका के साथ टैरिफ वार्ता के दौरान किया था.

वहीं, ताइवान की सरकारी ऊर्जा कंपनी CPC पहले ही इस प्रोजेक्ट में निवेश और गैस खरीदने को लेकर एक गैर-बाध्यकारी समझौते पर दस्तखत कर चुकी है. इस प्रोजेक्ट में अब तक कितनी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है?

रिपोर्टों के मुताबिक 50 से ज्यादा कंपनियां इस विशाल पाइपलाइन प्रोजेक्ट में निवेश को लेकर रुचि दिखा चुकी हैं.

इनमें जापान की प्रमुख ऊर्जा कंपनी JERA का नाम भी शामिल है हालांकि जापान अभी भी अपनी कंपनियों को इतने बड़े और जोखिम भरे प्रोजेक्ट में शामिल करने को लेकर कुछ हद तक हिचकिचाहट दिखा रहा है.

अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो इसका फायदा क्या होगा?

अगर यह पाइपलाइन प्रोजेक्ट पूरी तरह लागू हो जाता है तो यह अमेरिका में बनी एलएनजी गैस को एशियाई बाजारों तक पहुंचाने का एक बड़ा जरिया बन सकता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार अनुमान है कि इससे हर साल करीब 2 करोड़ मीट्रिक टन तरलीकृत गैस का निर्यात किया जा सकेगा जिससे अमेरिका और साझेदार देशों, दोनों को आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है.

प्रोजेक्ट को लेकर आगे का समय सीमा क्या तय है?

कंपनी के मुताबिक पाइपलाइन हिस्से के लिए अंतिम निवेश फैसला 2026 में और निर्यात टर्मिनल के लिए 2027 की शुरुआत में लिए जाने की योजना है.

अगर सबकुछ तय समय पर आगे बढ़ा तो 2031 तक इस प्रोजेक्ट से एलएनजी निर्यात शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है.

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📡 स्रोत: NewsData.io

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