ट्राउट मछलियों के प्रजनन काल में नदी-नालों में मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध
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नवंबर 03, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश में ट्राउट मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन एवं संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के ठंडे जल क्षेत्रों की नदियों और उनके सहायक नदी-नालों में मछली पकड़ने पर चार माह के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा।
निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य विभाग ओम कांत ठाकुर ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि में सरकारी ट्राउट फार्म तथा निजी फार्मों और रेसवेज से ट्राउट मछली की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। प्रतिबंध केवल ट्राउट जलाशयों, नदियों एवं नालों में खेल मछली पकड़ने (एंगलिंग) पर लागू होगा।
मत्स्य विभाग के ट्राउट फार्म पतलीकुहल के उपनिदेशक ने बताया कि सर्दियों का मौसम ठंडे पानी में पाई जाने वाली रेनबो ट्राउट और ब्राउन ट्राउट मछलियों का प्रमुख प्रजनन काल होता है। इस दौरान मछलियों को प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने का अवसर देने से उनकी संख्या में वृद्धि होती है। जलीय संपदा और मत्स्य संसाधनों के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक है।
प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा विशेष उड़नदस्तों का गठन किया गया है। ये दल ट्राउट जल क्षेत्रों तथा नदी-नालों में नियमित निगरानी रखेंगे। प्रतिबंधित अवधि के दौरान मछली पकड़ते हुए पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध मत्स्य अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मत्स्य विभाग ने स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे प्रतिबंध की अवधि के दौरान विभाग का सहयोग करें। साथ ही नदी-नालों में अवैध रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोकने में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि प्रदेश की बहुमूल्य जलीय संपदा और ट्राउट मछलियों का संरक्षण किया जा सके।