राजनीति

तुष्टिकरण में अंधी कांग्रेस सरकार ने संसद व संविधान द्वारा मान्य राष्ट्रगीत का किया अनादर: सिकंदर कुमार

लेखक: AIR Shimla अंतिम अपडेट: 22 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

अगस्त 22, शिमला (हिमाचल प्रदेश): राज्यसभा सांसद प्रो. (डॉ.) सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर कांग्रेस सरकार और उसके विधायकों के आचरण पर कड़ा रोष व्यक्त किया है।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि संसद द्वारा पारित व्यवस्थाओं और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों द्वारा मान्य राष्ट्रगीत का विरोध कर कांग्रेस ने देवभूमि हिमाचल को शर्मसार किया है।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा, "संसद द्वारा पारित नियमों और राष्ट्रीय मर्यादाओं के तहत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को जो सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, उसे मानने से हिमाचल की कांग्रेस सरकार साफ इनकार कर रही है।

देश की आजादी का मूल मंत्र रहे 'वंदे मातरम्' से कांग्रेस को इतनी चिढ़ क्यों है?" उन्होंने कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस पार्टी और उसकी कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) देश के संविधान और सर्वोच्च संसद से भी ऊपर हैं? डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा, "हिमाचल प्रदेश विधानसभा एक गरिमामयी संवैधानिक संस्था है।

वहां कांग्रेस के विधायकों ने संविधान की शपथ और संसदीय मर्यादाओं को ताक पर रखकर अपनी पार्टी की कार्यसमिति (CWC) के संकीर्ण राजनीतिक फरमान को प्राथमिकता दी।

यह कृत्य सीधे तौर पर भारत के संविधान, संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला अपमान है।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से धर्म और जाति के आधार पर तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है।

पार्टी की कार्यसमिति द्वारा राष्ट्रगीत के केवल दो छंद गाने का फैसला और अब विधानसभा में इसका खुला विरोध कांग्रेस के दोहरे चरित्र और राष्ट्रभक्ति के प्रति अनादर को उजागर करता है। डॉ. कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश वीरों, सैनिकों और बलिदानियों की भूमि है। यहां का प्रत्येक नागरिक मातृभूमि के वंदन को सर्वोपरि मानता है।

ऐसे में सत्ता के मद में चूर कांग्रेस सरकार का यह कृत्य प्रदेश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

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AIR Shimla

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