त्योहारों में पटाखों से सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश
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05 नवंबर, नई दिल्ली : त्योहारों का मौसम आते ही पटाखों और आतिशबाजी का उत्साह बढ़ जाता है, लेकिन जरा सी लापरवाही गंभीर हादसों की वजह बन सकती है। प्रदूषण के साथ-साथ पटाखों से होने वाली आंखों की चोटों और अन्य दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विस्तृत सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि त्योहार खुशियों के साथ सुरक्षित भी रहें।देश में त्योहारी सीजन के दौरान अनेक स्थानों पर पटाखों के जरिए उत्सव मनाने की पुरानी परंपरा रही है।
खासकर दशहरा, दीपावली और नववर्ष जैसे मौकों पर आतिशबाजी का खूब इस्तेमाल देखने को मिलता है। हालांकि, समय-समय पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण और दुर्घटनाओं को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आती रही हैं। चाहे प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल हो या दिवाली जैसे मौकों पर पटाखे जलाने का समय तय करना।
लेकिन इससे इतर, पटाखों के चलते होने वाले हादसों और गंभीर चोटों की रोकथाम को लेकर भी लगातार आवाज उठती रही है।इस दिशा में काम करने वाले कई सामाजिक संगठनों और डॉक्टरों की ओर से पटाखों से होने वाली चोटों की रोकथाम को लेकर लगातार मांग की जाती रही है। इसी कड़ी में दिल्ली उच्च न्यायालय में पटाखों से होने वाली आंखों की गंभीर चोटों की रोकथाम को लेकर एक याचिका भी दायर की गई थी।
ऐसे ही संगठनों और नागरिकों की मांग पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से पटाखों की सुरक्षित हैंडलिंग को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशानिर्देशों में पटाखों के निर्माण से लेकर उनकी पैकेजिंग, सुरक्षित इस्तेमाल और हादसे की स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा जैसे तमाम अहम पहलू शामिल किए गए हैं।इन दिशानिर्देशों में अधिकृत निर्माताओं के लिए कड़े सुरक्षा नियम, बेरियम जैसे कई तरह के खतरनाक रसायनों पर सख्त प्रतिबंध और पैकेजिंग से जुड़े नए मानक तय किए गए हैं।
वहीं, पटाखे जलाने को लेकर आम लोगों के लिए भी कई जरूरी बातें बताई गई हैं, जिनमें खुले और निर्धारित स्थानों पर सुरक्षित तरीके से पटाखे चलाने की सलाह दी गई है। साथ ही, कम उम्र के बच्चों के लिए पटाखे फोड़ते समय बड़ों की सीधी निगरानी को बेहद जरूरी बताया गया है। इसके अलावा, कार्बाइड या धातु के पाइप से बनी पटाखे फोड़ने वाली देसी गन जैसे खतरनाक उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी जारी की गई है।प्रदूषण से बचाव के लिए ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने के संबंध में भी दिशानिर्देशों में विस्तार से जानकारी दी गई है।
दिशानिर्देशों के मुताबिक, ग्रीन पटाखों की पहचान और डिब्बे पर मौजूद क्यूआर कोड के जरिए उनकी असलियत की पुष्टि को लेकर भी जागरूकता फैलाई जा रही है। हादसों की रोकथाम के इन उपायों के अलावा, किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर चिकित्सा सहायता और प्राथमिक उपचार को लेकर भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
इनमें आग से झुलसने की स्थिति से लेकर आंखों की चोट तक के लिए तुरंत ठंडे पानी का इस्तेमाल करने और फौरन डॉक्टर के पास जाने जैसे प्राथमिक उपचार के निर्देश शामिल हैं। पटाखों को लेकर कड़े नियमों का समर्थन करने वाले संगठनों ने सरकार के इन दिशानिर्देशों का स्वागत किया है। हालांकि, कई मंचों से इन दिशानिर्देशों को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की मांग भी की जा रही है।
इसमें पटाखों की बिक्री पर टैक्स बढ़ाने, बच्चों द्वारा केवल बड़ों की निगरानी में ही पटाखे जलाए जाने और अस्पतालों में पटाखों से होने वाली चोटों का विस्तृत डेटाबेस तैयार करने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों में पटाखों के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए सुरक्षा अभ्यास आयोजित करने और हादसों के वक्त तुरंत प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसी सकारात्मक पहलों पर भी जोर दिया जा रहा है।इन तमाम सकारात्मक पहलों और सरकार द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों के पालन से न केवल पटाखे जलाते समय हमें और हमारे परिवार को पुख्ता सुरक्षा मिलेगी, बल्कि हमारे त्योहारों और उत्सवों का आनंद भी बिना किसी हादसे के दोगुना हो जाएगा।