उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर भर्ती सुनिश्चित करने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के सख्त निर्देश, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की होगी नियमित मॉनिटरिंग
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भोपाल, 28 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। मंत्रालय में आयोजित बैठक में उन्होंने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप और स्वास्थ्य संस्थानों में समय से भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अधिकारियों से लेकर मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तक की जिम्मेदारी तय हो और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में से लगभग 30 प्रतिशत ही पर्याप्त समय पहले स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती हो पा रही हैं। इस स्थिति में सुधार के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विशेष कार्ययोजना के अनुरूप समन्वित प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी, आवश्यक जांच और उपचार के साथ समय पर संस्थागत भर्ती सुनिश्चित की जाए। आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को सक्रिय करते हुए फॉलोअप की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन और निर्धारित प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत पात्र महिलाओं की जांच तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही, परिवारजनों को नियमित जांच और संस्थागत प्रसव के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया।
ई-संजीवनी से दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ परामर्श की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का प्रभावी उपयोग बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए लोगों को सेवा के प्रति जागरूक करने और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उनका विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में तकनीक के व्यापक उपयोग की क्षमता का उदाहरण यूपीआई है। इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल कर नागरिकों को सहज और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उन्होंने ई-संजीवनी के उपयोग में आने वाली बाधाओं और सेवाओं की उपलब्धता में मौजूद अंतराल की पहचान कर उन्हें दूर करने के निर्देश दिए। आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, सेवा के उपयोग और उसके परिणामों की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया, ताकि मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श के लिए अनावश्यक आवागमन न करना पड़े।
अनमोल पोर्टल और सुमन कमांड सेंटर से होगी निगरानी
बैठक में जानकारी दी गई कि अनमोल पोर्टल पर लगभग 6.2 लाख गर्भवती महिलाओं का विवरण दर्ज है, जिनमें करीब 2 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में चिह्नित किया गया है। सुमन इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के माध्यम से भी इन महिलाओं के फॉलोअप की निगरानी की जा रही है। पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी संबंधित आशा कार्यकर्ताओं और जिला अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डिजिटल व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध निगरानी और संस्थागत भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुमन पंचायत की अवधारणा को प्रोत्साहित करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर भी बल दिया।
नवजात और बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के निर्देश
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार की व्यवस्थाओं को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और उपकरणों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान, उपचार और पोषण पुनर्वास के साथ एनीमिया, दस्त और निमोनिया जैसी प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम के लिए संचालित कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान देने को कहा।
उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार के लिए विभागीय समन्वय, तकनीक का उपयोग और मैदानी अमले की सक्रियता आवश्यक है। सभी संबंधित अधिकारी निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करें और सेवाओं की गुणवत्ता एवं उपलब्धता की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के आंकड़े
बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर तक मध्यप्रदेश में 90.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का प्रथम तिमाही में पंजीयन हुआ है, जबकि संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 93.4 प्रतिशत रहा। एसआरएस 2022-24 के अनुसार प्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 135 है।
गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए प्रदेश में 35 प्रसूति आईसीयू, 109 प्रथम रेफरल इकाइयां और 229 बर्थ वेटिंग होम क्रियाशील हैं। नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 62 विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां (SNCU), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयां (NBSU), 24 मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट, 68 बाल गहन चिकित्सा इकाइयां (PICU) और 318 पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, दो मानव दुग्ध बैंक क्रियाशील हैं, आठ प्रक्रियाधीन हैं और 26 लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट उपलब्ध हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में SNCU में 1,34,317 नवजात शिशुओं, NBSU में 45,982 नवजात शिशुओं और PICU में 1,19,032 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया गया। इसी अवधि में पोषण पुनर्वास केंद्रों में 80,092 बच्चों को सेवाएं मिलीं। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान SNCU में 72,595, NBSU में 22,793 और PICU में 59,450 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया गया, जबकि पोषण पुनर्वास केंद्रों में 47,912 बच्चों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन और नवाचार आधारित जन-जागरूकता गतिविधियों में मध्यप्रदेश को अगस्त 2026 में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। वहीं, एएमबी इंडेक्स 2025-26 में आयरन एवं फोलिक एसिड के निवारक अनुपूरण में प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला। ई-संजीवनी के माध्यम से अप्रैल से सितंबर 2026 तक प्रदेश में 59,914 जनरल टेली-कंसल्टेशन और 10,890 विशेषज्ञ टेली-कंसल्टेशन किए गए। मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से भी विशेषज्ञ टेली-कंसल्टेशन सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
बैठक में वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रभाकर तिवारी, डॉ. अर्चना मिश्रा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।