उदयपुर में 35 फीट ऊंचा आर्किटेक्ट्स टावर तैयार
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उदयपुर के शोभागपुरा 100 फीट रोड पर वास्तुकारों और शिल्पकारों को समर्पित 35 फीट ऊंचा ‘आर्किटेक्ट्स टावर’ बनकर तैयार हुआ। स्मारक में सूर्यघड़ी और टाइम कैप्सूल जैसी विशेषताएं हैं, जिसे 26 जनवरी 2047 को खोलने की परिकल्पना की गई है।
उदयपुर, 20 अक्टूबर। शहर में वास्तुकारों, डिजाइनरों, इंजीनियरों और शिल्पकारों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक अनूठी पहल के तहत करीब 35 फीट ऊंचा ‘आर्किटेक्ट्स टावर’ बनकर तैयार हो गया है। शोभागपुरा 100 फीट रोड स्थित ट्रैफिक आइलैंड पर निर्मित यह स्मारक वास्तुकला के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को समर्पित है।
इस पहल को AIISA for You की ओर से साकार किया गया है। इसकी संकल्पना आर्किटेक्ट सुनील एस. लढ़ा ने की, जबकि आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। स्मारक के माध्यम से वास्तुकला और शिल्पकला के महत्व को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
मेवाड़ की वास्तु परंपरा को समर्पित स्मारक
आर्किटेक्ट्स टावर मेवाड़ की समृद्ध वास्तु परंपरा से जुड़े सूत्रधार मंडन को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इसकी परिकल्पना पारंपरिक वास्तु ज्ञान और आधुनिक डिजाइन के समन्वय के रूप में की गई है।
इस स्मारक का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि वास्तुकला केवल इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, शहरों के विकास और सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सूर्यघड़ी और टाइम कैप्सूल हैं खास आकर्षण
आर्किटेक्ट्स टावर की प्रमुख विशेषताओं में इसकी वास्तुशिल्पीय संरचना, ऊर्ध्वाधर सूर्यघड़ी और टाइम कैप्सूल शामिल हैं। सूर्यघड़ी भारतीय खगोलीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।
वहीं, टाइम कैप्सूल को 26 जनवरी 2047 को खोलने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य वर्तमान उदयपुर की रचनात्मकता, यादों और भविष्य की आकांक्षाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की पहल
इस परियोजना को लेकर आर्किटेक्ट सुनील एस. लढ़ा, आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी, शहरवासी रोमी छाबड़ा, अक्षित माथुर और कमलेश डांगी ने अपने विचार साझा किए।
आर्किटेक्ट्स टावर उदयपुर में वास्तुकला, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मकता के महत्व को प्रदर्शित करने वाली एक अनूठी पहल है। यह स्मारक वास्तुकारों, डिजाइनरों, इंजीनियरों और शिल्पकारों के योगदान को पहचान देने के साथ ही भावी पीढ़ियों को भारतीय वास्तु परंपरा से जोड़ने का प्रयास भी है।
- सुनील एस. लढ़ा, आर्किटेक्ट
- प्रियंका कोठारी, आर्किटेक्ट
- रोमी छाबड़ा, शहरवासी
- अक्षित माथुर,
- कमलेश डांगी