उज्जैन- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से द्वितीय बैच का प्रशिक्षण आयोजित
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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला उज्जैन ने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों एवं नर्सिंग स्टॉफ का निरंतर क्षमता वर्धन आवश्यक है। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की समय पर पहचान, आवश्यक उपचार एवं प्रबंधन तथा गंभीर स्थिति में समय पर रेफरल सुनिश्चित करना है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु को न्यूनतम किया जा सके।
प्रशिक्षण में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता शर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश सिसोदिया , डॉ. अमिता सक्सेना — स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं नर्सिंग ऑफिसर विजयालक्ष्मी आठनेरे द्वारा चिकित्सकीय एवं व्यावहारिक विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रसव पूर्व एवं प्रसव के दौरान मातृ स्वास्थ्य की निगरानी, हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान, प्रसव संबंधी जटिलताओं का प्रबंधन, नवजात शिशु की प्रारंभिक देखभाल, जन्म के समय आवश्यक पुनर्जीवन, संक्रमण से बचाव तथा गंभीर मातृ एवं शिशु मामलों में समय पर उच्च स्वास्थ्य संस्था में रेफरल सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी दी गई।
प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को प्रोटोकॉल अनुसार उपचार एवं प्रबंधन, टीम वर्क, आवश्यक संसाधनों के समुचित उपयोग तथा प्रसव के दौरान सतत निगरानी के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं एवं व्यावहारिक समस्याओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया l
जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सभी डिलेवरी संस्थाओं में गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाएं, प्रशिक्षित मानव संसाधन एवं समय पर आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता में वृद्धि होगी तथा गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उज्जैन जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने हेतु द्वितीय बैच का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के लिए आयोजित किया गया है, ताकि वे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की पहचान, उपचार और समय पर रेफरल में दक्ष बन सकें। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर अभी भी भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च स्तर पर है, और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी इन जोखिमों को कम कर सकते हैं। यदि