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उज्जैन- राजसी वैभव के साथ निकली भगवान महाकाल की सवारी, 250 जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 21 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उज्जैन- राजसी वैभव के साथ निकली भगवान महाकाल की सवारी, 250 जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं

धार्मिक नगरी उज्जैन में विजयादशमी महापर्व पर भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी राजसी ठाट-बाट और पारंपरिक वैभव के साथ निकाली गई। वर्ष में एक बार नए शहर में निकलने वाली इस विशेष सवारी में श्रद्धा, भक्ति और लोक संस्कृति के अनूठे रंग देखने को मिले।

सवारी से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में भगवान श्री मनमहेश का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद पालकी रवाना हुई। मंदिर के मुख्य द्वार पर मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल के जवानों और श्री महाकालेश्वर बैंड ने पालकी में विराजित भगवान श्री मनमहेश को सलामी दी। सवारी में घुड़सवार दल भी शामिल हुआ। मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर दशहरा मैदान पहुंची। यहां कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने भगवान श्री मनमहेश का स्वागत और पूजन किया। इसके बाद परंपरानुसार शमी वृक्ष का पूजन संपन्न हुआ।

इस वर्ष सवारी में विशेष आकर्षण जनजातीय लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां रहीं। पहली बार रतलाम, धार, देवास और झाबुआ जिलों से आए 250 जनजातीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत की छटा बिखेरी।

दशहरा मैदान पर तीन सौ वैदिक बटुकों ने वैदिक मंत्रों का उद्घोष किया। वहीं, एक लाख वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र में बनाई गई विशाल और आकर्षक रंगोली ने आयोजन की भव्यता बढ़ाई। सवारी के दौरान पांच सौ किलोग्राम से अधिक फूलों से ड्रोन के माध्यम से भव्य पुष्पवर्षा भी की गई।

चामुंडा माता चौराहे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवारजनों ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्री मनमहेश का स्वागत किया। सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की, रंगोलियां सजाईं और स्वागत द्वारों के माध्यम से भगवान की पालकी का अभिनंदन किया।

दशहरा मैदान पर पूजन के बाद सवारी पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के साथ सवारी का समापन हुआ।

इसके पश्चात मंदिर के गर्भगृह में संध्या पूजन किया गया। परंपरानुसार भगवान श्री महाकालेश्वर को नवीन वस्त्र धारण कराए गए और श्रद्धालुओं को भगवान के श्री होल्कर, यानी मुखारविंद स्वरूप के दर्शन हुए। इस अवसर पर मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन भी किया गया।

विजयादशमी पर निकली भगवान श्री महाकालेश्वर की यह सवारी धार्मिक आस्था, पारंपरिक राजसी वैभव और जनजातीय लोक संस्कृति के संगम की साक्षी बनी।

बाइट - रोशन सिंह कलेक्टर उज्जैन

विजयादशमी की सभी शहर के लोगों को, जिलेवासियों को शुभकामनाएं और मंगल कामनाएं। जैसा आप देख पा रहे हैं, विजयादशमी के अवसर पर बाबा महाकाल की सवारी परंपरागत रूप से दशहरा मैदान पर आ चुकी है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन प्राप्त करने के लिए आतुर हैं। आज के अवसर पर जो बाबा महाकाल की सवारी है, वो शहर के इस हिस्से में आती है, दशहरा मैदान पर आती है, फ्रीगंज के बाद जो है टॉवर होते हुए शहीद पार्क होते हुए पूरे फ्रीगंज को और दशहरा मैदान वाला जो एरिया है, उससे होकर यहां सवारी आती है और पारंपरिक रूप से यहां पूजन बाबा महाकाल का होता है और बड़ी संख्या में आप देख पा रहे हैं श्रद्धालु इंतजार कर रहे हैं।

आज इस सवारी में जो है बहुत चीजें खास हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम हैं, ट्राइबल ग्रुप्स हैं, बैंड लगे हुए हैं, मंदिर के माध्यम से बैंड लगा हुआ है, पुलिस के माध्यम से बैंड लगा हुआ है और आप देख पा रहे हैं यहां बटुक जो हैं बाबा महाकाल के सवारी के इंतजार में हैं और जैसा आप देख पा रहे हैं पूरा एक सांस्कृतिक माहौल है और मैं एक बार पुनः आपको विजयादशमी की सभी लोगों को शुभकामनाएं देता हूं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।