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उज्जैन- वन विभाग की टीम ने की बोमा पद्धति से नीलगाय एवं कृष्णमृग को पकड़ने की तैयारी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उज्जैन-  वन विभाग की टीम ने की बोमा पद्धति से नीलगाय एवं कृष्णमृग को पकड़ने की तैयारी

इसी क्रम में डीएफओ अनुराग तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग एवं जनपद उज्जैन की टीम द्वारा ब्रजराजखेड़ी, हासमपुरा, सेवरखेड़ी, आलमपुर एवं पंथपिपलाई क्षेत्र का भ्रमण कर प्रस्तावित स्थल एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।

वन विभाग द्वारा 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक ब्रजराजखेड़ी में दक्षिण अफ्रीकी पद्धति से बोमा डोम लगाया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से नीलगाय एवं कृष्णमृग को पकड़ने की कार्यवाही की जाएगी।

डीएफओ श्री तिवारी ने ग्रामीणजनों से अभियान में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया है कि अभियान के दौरान कुछ दिनों तक खेतों में पानी न दें, ताकि नीलगाय को पकड़ने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न आए। साथ ही ग्रामीणजनों से अपील की गई है कि नीलगाय एवं कृष्णमृग के झुंड दिखाई देने पर उनकी लोकेशन व्हाट्सऐप (95750 02163)के माध्यम से वन विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे अभियान को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा सके। यह अभियान वन विभाग, जनपद उज्जैन, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, पशुपालन विभाग एवं विद्युत विभाग के बीच आपसी समन्वय द्वारा चलाया जाएगा।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

उज्जैन में वन विभाग ने नीलगाय और कृष्णमृग को पकड़ने के लिए बोमा पद्धति अपनाने की योजना बनाई है। यह विधि दक्षिण अफ्रीकी ‘बोमा डोम’ पर आधारित है, जिसे 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक ब्रजराजखेड़ी में लगाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य जंगली जानवरों के शिकार को नियंत्रित करना और वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वन्य जीवों और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन बना रहेगा। आम जनता को इससे बेहतर वन प्रबंधन, पर्यटन के अवसर और वन्य जीवों की सुरक्षा में सुधार का लाभ मिलेगा।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

वन संसाधनों की रक्षा के लिए शिकार की जगह संरक्षण पर बल देना चाहिए। नीलगाय एवं कृष्णमृग के साथ सहजीवन की दिशा में शिक्षा, जागरूकता और वैज्ञानिक निगरानी अपनाएँ। जब भी किसी प्रजाति को खतरा हो, तो कानूनी संरक्षण, आवास पुनर्स्थापन और सामुदायिक भागीदारी से समाधान खोजें। इस प्रकार हम प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की नई मिसाल स्थापित करेंगे, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को समृद्धि और शांति मिलेगी।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।