उज्जैन - व्यंग्यकार शरद जोशी स्मृति समारोह का आयोजन, व्यंग्य की बदलती दिशा पर हुआ विचार-विमर्श
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उज्जैन की कालिदास अकादमी में व्यंग्यकार शरद जोशी स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत साहित्य अकादमी एवं मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित इस समारोह में व्यंग्य की बदलती दिशा और विधा के क्षरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
साथ ही, उज्जैन के प्रमुख व्यंग्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ भी किया। समारोह के पहले सत्र में ‘व्यंजना की सीमा लांघता व्यंग्य, विधा के क्षरण का मुख्य कारक’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे रहे, जबकि अध्यक्षता चेन्नई के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो.
बी.एल. आच्छा ने की। प्रो. आच्छा ने कहा कि व्यंग्य में दर्शन, विचार और तर्क का होना आवश्यक है। जब व्यंग्य से ये तत्व गायब हो जाते हैं, तो उनकी जगह गाली ले लेती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को असहज करने वाली परिस्थितियों का विरोध व्यंग्य के माध्यम से किया जाता है। यह विरोध व्यक्तिगत भी हो सकता है और सामूहिक भी।
वहीं, व्यंग्यकार पिलकेंद्र अरोरा ने कहा कि व्यंग्यकार समाज में चेतना जागृत करने का काम करता है। उन्होंने कला के प्रति प्रतिबद्धता को सभी की जिम्मेदारी बताया। समारोह के दूसरे सत्र में उज्जैन के प्रमुख व्यंग्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। इसमें शांतिलाल जैन, शशांक दुबे, डॉ. हरीशकुमार सिंह, डॉ. स्वामीनाथ पांडेय, राजेंद्र नागर एवं पांखुरी वक्त ने प्रस्तुतियां दीं।
इस दौरान शरद जोशी की प्रमुख व्यंग्य रचनाओं के साथ देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, जंतर-मंतर और विदेशी हस्तक्षेप जैसे विषयों पर भी व्यंग्य प्रस्तुत किए गए। दूसरे सत्र का सूत्रधार डॉ. संदीप नाडकर्णी रहे।
बाइट - प्रो. शैलेन्द्र शर्मा, राष्ट्रीय समालोचक
व्यंग्यकार शरद जोशी स्मृति प्रसंग के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य है व्यंजना की सीमा को लांघता व्यंग्य। और उसके कारण व्यंग्य की जो स्थिति बदली है, उसको लेकर के विमर्श रखा गया। उसके साथ-साथ व्यंग्य पाठ भी व्यंग्यकारों के द्वारा यहाँ पर किया गया है। यह आयोजन कई दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि एक व्यंग्यकार की स्मृति में व्यंग्य पर विमर्श और व्यंग्य पाठ, ये दोनों मिलकर के पत्र प्रदेश साहित्य अकादमी की जो योजना है, उसके अंतर्गत बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुए। इस पर देश के अनेक वरिष्ठ व्यंग्यकारों ने भाग लिया।