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उमरिया के बहराधाम में 127 वर्षों से रामलीला की परंपरा जारी, व्यापारियों ने धर्मादा जुटाकर शुरू कराई थी रात्रिकालीन रामलीला

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 22 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उमरिया के बहराधाम में 127 वर्षों से रामलीला की परंपरा जारी, व्यापारियों ने धर्मादा जुटाकर शुरू कराई थी रात्रिकालीन रामलीला

127 साल की हुई उमरिया के बहराधाम की रामलीला,रघुराज मानस कला मंदिर का आयोजन,व्यापारियों ने धर्मदा कर लगाकर कराई थी रात में रामलीला की शुरुआत,वृन्दावन से आये कलाकार से रहे प्रस्तुति।

वीओ -01 उमरिया के बहरा धाम में रामलीला का मंचन किया जा रहा है, रघुराज मानस कला मंदिर ट्रस्ट के द्वारा बीते 126 सालों से रामलीला का मंचन कराया जाता है नगर के ह्रदयस्थल में स्थित बहरा धाम की रामलीला का समापन दशहरा में रावण वध के बाद रावण का विशाल पुतला दहन के बाद किया जाता है इस दौरान नगर सहित आसपास के कई गांव के लोग रामलीला देखने बहराधाम पंहुचते हैं.

बाइट -01 अजय सिंह (संचालक रघुराज मानस कला मंदिर उमरिया)

बाइट -02 राजेश शर्मा उमरिया बाइट -03 अशोक खट्टर उमरिया

वीओ -02 उमरिया की रामलीला से जुडा एक किस्सा है 60 के दशक तक रामलीला का मंचन दिन में हुआ करता था जिससे नगर के व्यापारी रामलीला देखने से वंचित हो जाते थे जिससे व्यथित ब्यापारियों ने आपसी सहमति से धर्मदा कर एकत्रित किया और खाने के तेल से मशाल जलाकर रात्रिकालीन रामलीला का मंचन शुरू कराया गया जो अनवरत जारी है।

बाइट -04 लक्ष्मीनारायण खंडेलवाल उमरिया बाइट -05 संदीप साहा (उमरिया)

बाइट -06 रतन खंडेलवाल (उमरिया)

बाइट -03 उमरिया की रघुराज मानस कला मंदिर महज रामलीला के लिए प्रसिद्द नहीं है बल्कि नवदुर्गा चल समारोह,राष्ट्रीय कुश्ती दंगल प्रतियोगिता,रंगमंच,रामचरित मानस जैसे कई सामाजिक सरोकारों से जुड़े काम संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष कराये जाते हैं जो हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को एकसूत्र में पिरोने का काम कर रही है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।