उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़ा,निचले इलाकों में चिंता बरकरार:मोहल्लों में अब भी भरा है बाढ़ का पानी, नाव के सहारे जरूरी सामान पहुंचा रहे लोग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →उन्नाव में गंगा के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव ने गंगा किनारे बसे निचले इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो दिनों में जलस्तर में गिरावट से राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन मंगलवार शाम को फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। बुधवार सुबह एक सेंटीमीटर की गिरावट के बाद जलस्तर 112.400 मीटर दर्ज किया गया।
हालांकि जलस्तर में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन निचले इलाकों में पहले से भरा बाढ़ का पानी अब भी पूरी तरह नहीं निकल सका है। मंगलवार शाम बढ़ा था जलस्तर केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 112.350 मीटर था। मंगलवार दोपहर तक इसमें ज्यादा बदलाव नहीं हुआ।
इसके बाद मंगलवार शाम छह बजे जलस्तर बढ़कर 112.410 मीटर पहुंच गया। बुधवार सुबह इसमें मामूली बदलाव के बाद एक सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई और जलस्तर 112.400 मीटर पर आ गया। सोमवार शाम की तुलना में बुधवार सुबह तक गंगा के जलस्तर में कुल 5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
लगातार हो रहे बदलाव के कारण नदी किनारे रहने वाले लोग जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। कई मोहल्लों में अब भी भरा पानी गंगाघाट क्षेत्र के गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, मोहम्मद नगर, रविदास नगर और मनोहर नगर के निचले हिस्सों में अब भी बाढ़ का पानी जमा है। कई गलियों और संपर्क मार्गों से पानी पूरी तरह नहीं निकल पाया है।
जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलने और रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी हो रही है। नाव से पहुंचा रहे जरूरी सामान पानी जमा होने के कारण कुछ परिवारों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गोताखोर इलाके में लोग नाव के जरिए जरूरी सामान लाते-ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
घरों के आसपास पानी जमा होने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर घटने लगा था तो उन्हें जल्द राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दोबारा बढ़ोतरी होने से चिंता बढ़ गई है। अब लोग जलस्तर में लगातार गिरावट का इंतजार कर रहे हैं।
बड़ी बढ़ोतरी नहीं, लेकिन खतरा टला नहीं फिलहाल गंगा के जलस्तर में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन निचले इलाकों में पहले से मौजूद पानी के कारण जनजीवन प्रभावित है। प्रशासन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि जलस्तर फिर बढ़ा तो निचले इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io