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यूपीः बांदा में नवमी पर अनोखी आस्था, गाल के आर-पार सांग निकालकर घंटों नृत्य करते हैं भक्त

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूपीः बांदा में नवमी पर अनोखी आस्था, गाल के आर-पार सांग निकालकर घंटों नृत्य करते हैं भक्त

बुंदेलखंड के बांदा में नवरात्रि की नवमी पर आस्था का अनोखा रूप देखने को मिलता है। यहां मां दुर्गा के भक्त गाल के आर-पार लोहे की नुकीली सांग निकालकर ढोल-नगाड़ों की धुन पर घंटों नृत्य करते हैं। इसे सांग नृत्य कहा जाता है, जो बुंदेलखंड की प्राचीन परंपराओं में शामिल है। नवमी के दिन सांग नृत्य करने वाले भक्त बांदा के प्रसिद्ध माहेश्वरी देवी मंदिर पहुंचते हैं।

यहां मां के दर्शन और पूजा के बाद पुजारी मंत्रोच्चार के साथ भक्तों के गाल में लोहे की सांग डालते हैं। इसके बाद भक्त मां की भक्ति में लीन होकर ढोल-नगाड़ों की धुन पर नृत्य करते हैं। स्थानीय मान्यता है कि सांग नृत्य करने से मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। भक्तों का दावा है कि नृत्य के दौरान उन्हें दर्द का एहसास नहीं होता।

इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए नवमी की रात मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।

बाइट- गोपाल अवस्थी (मंदिर के ट्रस्टी) बाइट- दिनेश कुमार (मंदिर के पुजारी)

बाइट- गर्वित खरे (श्रद्धालु) बाइट- लक्ष्मी गुप्ता (श्रद्धालु)

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।