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यूपी के काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन शुरू

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूपी के काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन शुरू

वाराणसी में धनतेरस के अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गुरुवार रात से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रही। शुक्रवार सुबह जैसे ही मां स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर 'जय मां अन्नपूर्णा' के जयकारों से गूंज उठा।

देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की और परंपरागत खजाना प्राप्त किया।मंदिर के प्रथम तल पर विराजमान मां स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के पांच दिवसीय दर्शन का शुभारंभ शुक्रवार सुबह हुआ। पट खुलने से पहले सुबह तीन से पांच बजे तक 11 आचार्यों के सानिध्य में महंत शंकरपुरी ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया।

वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां की आरती उतारी गई। इसके बाद सुबह ठीक पांच बजे आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए।इस दौरान महंत शंकरपुरी ने कामना की कि सभी के घर अन्न-धन से भरे रहें, देश में खुशहाली आए और कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। मां के दर्शन के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचे।

विदेशों से आए भक्तों में भी दर्शन को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को परंपरा के अनुसार सिक्का और धान का खजाना वितरित किया गया। भक्तों ने इसे मां का आशीर्वाद मानकर अपने साथ रखा। दर्शन व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में बाईं ओर बनाई गई अस्थायी सीढ़ियों से श्रद्धालु प्रथम तल तक पहुंच रहे हैं।

बुजुर्गों, दिव्यांगों और असहाय श्रद्धालुओं की सहायता के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। वहीं, आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम भी मौजूद है।

बाइट---महंत शंकरपुरी

💡 पृष्ठभूमि (Background)

वाराणसी के काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन की शुरुआत के साथ लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए। यह घटना वाराणसी के धार्मिक महत्व को और उजागर करती है, क्योंकि धनतेरस के अवसर पर देवी के दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और समृद्धि की उम्मीद होती है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। आम जनता के लिए यह अनुभव सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक संतोष का प्रतीक बनता है, जिससे मनोबल बढ़ता है और सामाजिक समरस

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।