अपराध

यूपी के लखनऊ में साइबर अपराधियों के कॉलिंग नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार!

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 1 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूपी के लखनऊ में साइबर अपराधियों के कॉलिंग नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार!

वीओ - उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है... लखनऊ पुलिस की साइबर क्राइम सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज का पर्दाफाश किया है... पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने में किया जा रहा था...

दरअसल, साइबर अपराधी फर्जी पुलिस और सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगी का शिकार बनाते थे... शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल के पीछे एक तकनीकी नेटवर्क काम कर रहा था... जिसमें सिम बॉक्स और VPN गेटवे जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था...

आइए जानते हैं पूरा मामला...

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हेडर - लखनऊ में अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क पर बड़ा एक्शन!

  • पुलिस ने चार ठिकानों पर छापेमार कर कुल 6 अवैध 32-पोर्ट सिम बॉक्स बरामद किए
  • (इन सिम बॉक्स में) एक साथ 192 सिम कार्ड लगाने की व्यवस्था थी
  • (इसके अलावा) 3 वीपीएन गेटवे और 21 स्मार्ट स्विच भी जब्त किए गए
  • (नेटवर्क को संचालित रखने के लिए) 3 स्मार्ट हब और 4 इनवर्टर-यूपीएस यूनिट मिले
  • (जबकि) बिजली की निर्बाध सप्लाई के लिए 18 बैटरियां भी बरामद की गईं
  • (छापेमारी के दौरान) एक लॉक टैबलेट, वाई-फाई राउटर, सुरक्षा कैमरे और और अन्य नेटवर्किंग उपकरण भी मिले
  • (जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने) सुशांत गोल्फ सिटी के स्वाति अपार्टमेंट में तलाशी अभियान चलाया
  • (जबकि) पारा की आशीर्वाद बिल्डिंग, बीबीडी के गोल्ड लाइन अपार्टमेंट और चिनहट के जीजे पैराडाइज में भी तलाशी ली गई
  • (ADCP क्राइम किरन यादव के मुताबिक) संदिग्ध मोबाइल नंबरों की CDR और इंटरनेट कनेक्शन का विश्लेषण किया गया
  • (इसके बाद) दूरसंचार और इंटरनेट कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर संदिग्ध ठिकानों को चिह्नित किया गया
  • (वहीं) पुलिस ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत अंजाम दिया है
  • (जिसका मकसद) 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है

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वीओ - लखनऊ में हुई इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा इस अवैध नेटवर्क से आगे बढ़ गया है... दरअसल, साइबर ठगी के ऐसे मामलों में सिर्फ कॉल करने वाले शख्स तक पहुंचना काफी नहीं होता, बल्कि यह पता लगाना भी जरूरी होता है कि उसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है... फिलहाल पुलिस बरामद उपकरणों की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच करा रही है...

इनके जरिए इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड, कॉलिंग पैटर्न और संदिग्ध नंबरों की पड़ताल की जा रही है... पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए किन-किन लोगों को कॉल की गई और क्या इसका इस्तेमाल दूसरे साइबर अपराधों में भी हुआ है... मामले में साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है...

वहीं, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसके पीछे मौजूद मास्टरमाइंड की तलाश जारी है... अब जांच का फोकस इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने और साइबर ठगी के इस संगठित तंत्र को खत्म करने पर है...

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।