यूपी के मुरादाबाद के पीतल उत्पादों की दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और केरल तक मांग
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धनतेरस के पावन पर्व पर मुरादाबाद का ऐतिहासिक पीतल बाजार एक बार फिर ग्राहकों की भीड़ से गुलजार है। सुबह से ही बाजार में खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। धन और समृद्धि की कामना के साथ लोग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों समेत पीतल के बर्तनों और पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
इस बार बाजार में स्वदेशी पीतल उत्पादों, पारंपरिक हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुओं की खास मांग देखने को मिल रही है। दुकानदारों के मुताबिक, ग्राहक विदेशी वस्तुओं के बजाय देसी हस्तशिल्प और पारंपरिक पीतल उत्पादों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। खासतौर पर पीतल से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई हैं।कारोबारियों का कहना है कि इस बार मुरादाबाद में तैयार पीतल की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की मांग सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और केरल समेत कई राज्यों से भी ऑर्डर मिले हैं।
इन ऑर्डर की आपूर्ति की जा चुकी है और अब स्थानीय बाजार में भी अच्छी बिक्री हो रही है। बाजार में 100 ग्राम से लेकर 20 किलोग्राम तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 100 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक है।वहीं, सर्राफा बाजार में भी धनतेरस की रौनक देखने को मिल रही है। इस बार सोने के मुकाबले चांदी से बनी वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
ग्राहक चांदी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के साथ मछली, कछुआ, तुलसी का पौधा और हाथी जैसी वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं। व्यापारियों के मुताबिक, वास्तु और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए ग्राहक चांदी से बनी इन वस्तुओं को खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
बाइट-अनुज अग्रवाल – कारोबारी बाइट-अमित रस्तोगी – कारोबारी
बाइट-दीप चंद – ग्राहक बाइट-आनंद – कारोबारी
बाइट-अंकित गुप्ता – कारोबारी
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मुरादाबाद का पीतल बाजार धनतेरस के पावन पर्व पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और केरल के ग्राहकों से फिर से भर जाता है। यह विषय पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और स्वदेशी पीतल उत्पादों की मांग पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि प्राचीन शिल्प अभी भी आधुनिक शहरी लोगों के बीच लोकप्रिय है और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे आम जनता को सस्ती, टिकाऊ और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पूजन सामग्री उपलब्ध होती है, जिससे स्थानीय कारीगरों को आय और पहचान मिलती है।