उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद, कहा- हर निर्माणकर्ता के प्रेरणास्रोत हैं भगवान विश्वकर्मा
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रीवा, 17 सितंबर 2026। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बाबा घाट में आयोजित विश्वकर्मा जयंती समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वकर्मा मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश एवं देश की समृद्धि तथा निरंतर विकास की कामना की।
समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विश्वभर में हर निर्माणकर्ता के प्रेरणास्रोत भगवान विश्वकर्मा हैं। देश के कल-कारखानों और निर्माण स्थलों पर विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से रीवा में भी बड़े-बड़े निर्माण कार्य हुए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्वकर्मा जयंती के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। प्रधानमंत्री ने अपने नेतृत्व में देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा गतिविधियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रक्तदान और आशीर्वाद के लाखों दीप जलाकर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
उप मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सदैव आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की, ताकि वे देश के विकास और नवनिर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करते रहें।
कार्यक्रम में विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. पंचूलाल प्रजापति, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधिगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा विश्वकर्मा जयंती समारोह में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना का विषय है, जो निर्माण और शिल्प के पवित्र देवता को सम्मानित करने का एक धार्मिक कार्यक्रम है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य के प्रमुख नेता द्वारा सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं को मान्यता देने और विकास की कामना करने का प्रतीक है। इस प्रकार के कार्यक्रम से आम जनता में सामाजिक एकजुटता और धार्मिक विश्वास की भावना बढ़ती है, और यह प्रेरणा देता है कि निर्माण और विकास के क्षेत्र में पारंपरिक मूल्यो