उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की पहल से बिछिया नदी पर बनेगा 21.98 करोड़ का पुल, लक्ष्मणबाग और संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी
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विंध्य में संस्कृत के संरक्षण और विकास को नई गति देने पर जोर, उप मुख्यमंत्री ने किया पुल निर्माण का भूमिपूजन; 1,620 मीटर सड़क का भी होगा निर्माण
भोपाल, 14 अक्टूबर। विंध्य क्षेत्र में विकास कार्यों के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बिछिया नदी पर पुल निर्माण का भूमिपूजन किया। लक्ष्मणबाग परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि लगभग 21 करोड़ 98 लाख 87 हजार रुपये की लागत से पुल का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ 1,620 मीटर लंबी सड़क भी बनाई जाएगी। इस परियोजना से लक्ष्मणबाग परिसर और रामानुज संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच आवागमन सुगम होगा तथा क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पुल बनने से नदी के दोनों ओर स्थित जमीनों के बीच संपर्क बेहतर होगा। वार्ड क्रमांक 45 के निवासियों के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण से संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को लक्ष्मणबाग परिसर तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी और वे यहां मंत्रोच्चार, धार्मिक गतिविधियों तथा गौसेवा से जुड़ सकेंगे।
‘संस्कृत से ही समृद्ध होगी सनातन संस्कृति’
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि संस्कृत देवभाषा है और भारतीय सनातन संस्कृति तथा संस्कारों का आधार है। संस्कृत भाषा का संरक्षण और विकास भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के साथ विश्वगुरु बनाने के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वैदिक परंपरा में ज्ञान, दर्शन और भक्ति के अनेक स्रोत संस्कृत में ही निहित हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे कठिन दौर भी आए, जब विदेशी आक्रांताओं ने संस्कृत के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों को नष्ट करने का प्रयास किया। उन परिस्थितियों में विंध्य की धरती ने संस्कृत भाषा और उसके विद्वानों की परंपरा को संरक्षण दिया। इस विरासत को आगे बढ़ाना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि संस्कृत के विकास के उद्देश्य से लक्ष्मणबाग परिसर में पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय का परिसर शुरू किया गया है। यहां पहले संचालित संस्कृत विद्यालय को भी पुनः शुरू करने की योजना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परिसर संस्कृत अध्ययन, वैदिक परंपरा और सनातन संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा।
पुल निर्माण से लक्ष्मणबाग ट्रस्ट को भी मिलेगा लाभ
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण से लक्ष्मणबाग ट्रस्ट को 10 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। पुल का निर्माण पूरा होने के बाद ट्रस्ट को 11 करोड़ रुपये और मिलेंगे। इससे परिसर के मंदिरों और उनसे जुड़ी संस्थाओं में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने गौसेवा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लक्ष्मणबाग परिसर, बसामन मामा गौ अभयारण्य और हिनौती गौधाम में गौमाता की सेवा के लिए व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय परंपरा और संवेदना से जुड़ी है तथा इसके लिए समुचित व्यवस्था करना आवश्यक है।
संस्कृत के विकास की परंपरा को मिल रही नई गति
कार्यक्रम में सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों से विंध्य क्षेत्र में संस्कृत भाषा के विकास की परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने संस्कृत को सनातन संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर शिवशंकर मिश्र ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ज्ञान का विशाल भंडार है और उनका अध्ययन करने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है। संस्कृत वैदिक चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, रेडक्रॉस चेयरमैन डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, पंडित बाला व्यंकटेश शास्त्री, रामसुमन दास, हेमलता सिंह, पार्षदगण, सेतु निर्माण के कार्यपालन यंत्री एस.पी. तिवारी, एसडीएम हुजूर जितेंद्र तिवारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
बिछिया नदी पर पुल निर्माण की यह परियोजना क्षेत्र में आवागमन बेहतर करने के साथ लक्ष्मणबाग परिसर और संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच संपर्क मजबूत करेगी। इसके साथ संस्कृत शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर बिछिया नदी पर 21.98 करोड़ के पुल के निर्माण के बारे में है, जिसे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विंध्य क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया है। यह पहल लक्ष्मणबाग और संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच 1,620 मीटर की नई सड़क के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाएगी, जिससे दोनों संस्थानों के बीच यात्रा समय कम होगा। यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। इसके अलावा, बेहतर परिवहन से शिक्षा और स्वास