यूपीः वृंदावन में साधु-संतों और क्षत्रिय समाज ने किया शस्त्र पूजन, सनातन परंपरा के महत्व पर दिया जोर
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धर्मनगरी वृंदावन में विजयदशमी के अवसर पर साधु-संतों और क्षत्रिय समाज की ओर से शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुनरख मार्ग स्थित श्रीराम फार्म हाउस में हुए कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ शस्त्रों की पूजा की गई। वृंदावन के धर्माचार्य ने पूजन संपन्न कराया।
इस अवसर पर प्रमुख संत फूलडोल महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति में विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि सनातनियों की सरकार ने हिंदू समाज का मान-सम्मान बढ़ाया है। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक ठाकुर हरि बल्लभ ने बताया कि विजयदशमी सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। कार्यक्रम में अम्बरीश पुंडरीक, अमरेश सिंह पुंडीर, आशीष, जीते राणा, हरि बलवान, विजय राघव, मुकेश सिकरवार, उदय ठाकुर और प्रताप सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
बाइट - हरिवल्लभ सिंह, संयोजक बाइट - संत फूलडोल महाराज, प्रमुख संत
बाइट - संत बाइट - मुकेश सिकरवार, क्षत्रिय समाज
💡 पृष्ठभूमि (Background)
वृंदावन में विजयदशमी के दिन साधु-संतों और क्षत्रिय समाज ने शस्त्र पूजन का आयोजन किया, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार और शस्त्रों की पूजा की गई। यह परंपरा सनातन संस्कृति के अनुसार युद्ध के हथियारों को पवित्र करने का एक प्राचीन रीति है। इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए है क्योंकि यह धार्मिक और सामाजिक एकता को दर्शाता है, तथा प्राचीन परम्पराओं को जीवित रखने का संदेश देता है। आम जनता के लिए इसका असर यह है कि यह सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, लोगों को अपने धर्मिक मूल्यों को पुनः याद दिलाता है और समाज में शा